उत्तर प्रदेश में करीब तीन दशक पुराने land dispute case की सुनवाई के दौरान एक सिविल जज को कथित तौर पर प्रभावित करने की कोशिश का मामला सामने आया है। Allahabad High Court ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारी पर इस तरह का दबाव independence of judiciary और administration of justice को प्रभावित करता है।
मामला देवी पाटन के Divisional Commissioner Durga Shakti Nagpal से जुड़ा है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने लंबित जमीन विवाद के संदर्भ में सिविल जज शबीना खान को फोन किया था। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी लंबित मामले में शामिल पक्ष द्वारा इस तरह सीधे अदालत से संपर्क किए जाने के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
Lucknow Bench के जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी ने कहा कि न्यायाधीशों को न्यायिक कार्यवाही के संबंध में धमकी या दबाव देने से जुड़े Supreme Court precedent को देखते हुए यह मामला गंभीर है।
अदालत ने माना कि इस पूरे घटनाक्रम पर criminal contempt से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली उचित अदालत द्वारा विचार किया जाना चाहिए।
जस्टिस रिजवी ने निर्देश दिया कि Chief Justice या किसी वरिष्ठ न्यायाधीश से आवश्यक दिशा-निर्देश लेने के बाद मामले को संबंधित अदालत के सामने रखा जाए।
फोन कॉल को लेकर क्या आरोप है?
हाई कोर्ट ने कहा कि सिविल जज शबीना खान को कथित तौर पर किए गए फोन कॉल से जुड़े आरोपों को वह नजरअंदाज नहीं कर सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि यह चिंताजनक है कि किसी litigating party ने लंबित मामले के संदर्भ में इस तरह फोन के जरिए अदालत तक पहुंचने की कोशिश की।
हालांकि, इस स्तर पर फोन कॉल और उससे जुड़े आरोपों की अंतिम सत्यता पर अदालत ने कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।
1997 से चल रहा है जमीन विवाद
जस्टिस रिजवी ने यह टिप्पणी Jyoti Vidya Mandir School की ओर से दायर transfer application की सुनवाई के दौरान की। यह आवेदन 1997 में Municipal Council of Gonda के खिलाफ दायर नियमित मुकदमे से संबंधित है।
मामला वर्तमान में सिविल जज शबीना खान की अदालत में लंबित है और विवाद कई Nazul land parcels से जुड़ा हुआ है।
इन जमीनों का रिकॉर्ड देवी पाटन डिवीजन के Divisional Commissioner के नाम पर दर्ज बताया गया है।
जमीन को लेकर सरकार का क्या पक्ष है?
डिविजनल कमिश्नर की ओर से हाई कोर्ट के सामने रखे गए पक्ष के अनुसार, इन जमीनों को एक government office building और अन्य सरकारी उद्देश्यों के लिए सुरक्षित रखा गया था।
राज्य के अधिकारियों का आरोप है कि इसी जमीन पर एक school building का निर्माण किया गया। इस जमीन को लेकर विवाद करीब तीन दशकों से civil court में लंबित है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर जोर
हाई कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य केंद्र judicial independence रहा। अदालत ने संकेत दिया कि किसी न्यायिक अधिकारी को लंबित मामले में प्रभावित करने या दबाव में लाने की कथित कोशिश को सामान्य घटनाक्रम की तरह नहीं देखा जा सकता।
मामला अब उचित criminal contempt court के समक्ष रखे जाने की दिशा में बढ़ रहा है, जहां आरोपों पर आगे विचार किया जा सकता है।


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