NISAR Satellite ने Antarctica में कैद की ‘विशाल पक्षी’ जैसी आकृति, जानिए रंग-बिरंगी Radar Image का वैज्ञानिक मतलब

नई दिल्ली: NASA-ISRO के संयुक्त NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) सैटेलाइट ने East Antarctica की बर्फीली सतह की एक बेहद दिलचस्प Radar Image जारी की है। इस तस्वीर में बर्फ के बीच एक विशाल पक्षी जैसी आकृति दिखाई देती है, जिसने वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों का भी ध्यान खींचा है। हालांकि, NASA ने स्पष्ट किया है कि यह किसी वास्तविक जीव की तस्वीर नहीं, बल्कि Radar Data से तैयार की गई वैज्ञानिक इमेज है।

यह तस्वीर Nunatak Zaterjavshijsja नामक पर्वत क्षेत्र की है, जहां ग्लेशियर के बहाव और बर्फ की संरचना को L-band Radar की मदद से रिकॉर्ड किया गया। यह डेटा वैज्ञानिकों को Glacier MovementIce Sheet DynamicsForestsWetlands और Natural Hazards जैसे EarthquakesLandslides और Floods की बेहतर निगरानी में मदद करेगा।

कैसे तैयार हुई यह Radar Image?

यह इमेज अगस्त 2025 में एकत्र किए गए L-band Radar Measurements के आधार पर बनाई गई थी। उस समय भारत और अमेरिका के वैज्ञानिक NISAR Satellite के दोनों Radar Systems की टेस्टिंग कर रहे थे।

सामान्य कैमरे की तरह यह सैटेलाइट तस्वीर नहीं लेता, बल्कि Microwave Radar Signals पृथ्वी की ओर भेजता है और वापस लौटने वाले सिग्नलों का विश्लेषण करता है। इससे बर्फ की सतह और उसके नीचे मौजूद संरचनाओं की जानकारी मिलती है, जो सामान्य Optical Images में दिखाई नहीं देती।

Radar Image के रंगों का क्या मतलब है?

NISAR Satellite की इस तस्वीर में दिखाई देने वाले रंग प्राकृतिक नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग Radar Signals के आधार पर तैयार किए गए हैं।

  • Magenta Color – बर्फ की चिकनी और समतल सतह को दर्शाता है, जहां Horizontally Polarized Signals परावर्तित हुए।
  • Green Color – ऐसी जगहों को दिखाता है जहां Vertically Polarized Signals बर्फ के भीतर तक पहुंचे या दरारों (Crevasses) जैसी असमान सतहों से टकराकर वापस आए।
  • White Color – उन क्षेत्रों को दर्शाता है जहां दोनों प्रकार के Radar Signals मजबूत रूप से मिले, जिससे मिश्रित सतही विशेषताएं सामने आईं।

वैज्ञानिकों के लिए क्यों है खास?

NASA Jet Propulsion Laboratory के Signal Analysis Engineer Seongsu Jeong के अनुसार, Radar Technology की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बर्फ और बर्फबारी की सतह के नीचे तक “देख” सकती है। इससे वैज्ञानिक Antarctic Ice की उन विशेषताओं का अध्ययन कर सकते हैं, जिन्हें सामान्य कैमरों से देख पाना संभव नहीं होता।

NASA और ISRO के वैज्ञानिक आने वाले समय में NISAR के L-band और S-band Radar Systems से प्राप्त और भी प्रोसेस्ड डेटा जारी करेंगे। इससे जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के व्यवहार और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है।

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