नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। कई इलाकों में सड़कें, पुल और इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं। नेपाल सरकार के अनुसार, बुधवार सुबह तिब्बत क्षेत्र में आए भूकंप के कुछ ही मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिली थी। इस घटनाक्रम के बाद आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी स्थिति बनी हो सकती है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे भूकंप आया और करीब तीन मिनट बाद बाढ़ की जानकारी मिली। अचानक आए सैलाब ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। सड़कें और पुल बह गए, घरों और वाहनों को नुकसान पहुंचा तथा कई क्षेत्रों का संपर्क पूरी तरह टूट गया।
2,000 फीट चौड़ा ग्लेशियर टूटा
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन से संकेत मिले हैं कि करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर ग्लेशियर का लगभग 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा।
कैलगरी विश्वविद्यालय के भूवैज्ञानिक डेनियल शुगर के अनुसार, यह विशाल हिमखंड करीब 4,000 फीट नीचे गिरा। इसके बाद ल्हेंडे खोला नदी में जबरदस्त पानी का बहाव पैदा हुआ, जो आगे भोटेकोशी नदी में पहुंचा। देखते ही देखते इसने निचले इलाकों में भारी तबाही मचा दी।
100 मीटर ऊंची पानी की लहर ने मचाई तबाही
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बाढ़ के भयावह मंजर का वर्णन किया। उनके मुताबिक, उन्होंने धुएं जैसे गुबार के साथ पानी की एक विशाल दीवार को तिमुरे बाजार की ओर तेजी से बढ़ते देखा।
बताया गया कि करीब 100 मीटर ऊंची बाढ़ की लहर बाजार में दाखिल हुई और कुछ ही समय में पूरा इलाका पानी के तेज बहाव में बह गया।
22 कंक्रीट पुल और 42 किलोमीटर सड़क बही
रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।
तबाही में:
- 22 कंक्रीट पुल बह गए।
- 5 बेली ब्रिज भी क्षतिग्रस्त या बह गए।
- करीब 42 किलोमीटर सड़क बाढ़ की चपेट में आ गई।
- नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी ईस्ट तक बाढ़ का पानी पहुंच गया।
नेपाल सरकार ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग को तीन महीने के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है।
कोलकाता का 32 सदस्यीय कैलाश मानसरोवर दल लापता
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ के बाद कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल संपर्क से बाहर है। दल में 30 पर्यटक और दो टूर मैनेजर शामिल हैं।
यह समूह 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा। बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे दल रसुवागढ़ी पहुंचा था। यहां से उसे नेपाल-तिब्बत सीमा पार कर तिब्बत जाना था। इसी दौरान इमिग्रेशन कार्यालय के पास अचानक बाढ़ आ गई।
इसके बाद दल के किसी भी सदस्य से संपर्क नहीं हो पाया। प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क बाधित होने और रास्ते बंद होने के कारण बचाव दलों के लिए वहां पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
पश्चिम बंगाल ने जारी की हेल्पलाइन
पश्चिम बंगाल सरकार ने नेपाल में फंसे या लापता राज्य के लोगों की जानकारी जुटाने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। सरकार भारतीय दूतावास और नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है।
राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर 033-24793311 और 9147890181 हैं। वहीं, कोलकाता पुलिस ने 18003455678 और व्हाट्सऐप नंबर 9874902880 जारी किया है।
केरल के 37 पर्यटक सुरक्षित, लेकिन नेपाल में फंसे
केरल के कन्नूर जिले के पय्यानूर क्षेत्र के 37 लोग भी नेपाल में फंसे हुए हैं। हालांकि, सभी के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई है। बाढ़ के कारण वे न तो आगे की यात्रा कर पा रहे हैं और न ही नेपाल से वापस लौट पा रहे हैं।
उनके स्थान और संपर्क संबंधी जानकारी प्रशासन को उपलब्ध करा दी गई है। केरल सरकार ने सहायता के लिए 9447111844 और 9737132147 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
कर्नाटक समेत कई राज्यों ने शुरू किया समन्वय
कर्नाटक सरकार ने नेपाल और तिब्बत में फंसे अपने नागरिकों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग टूर ऑपरेटरों और परिजनों से संपर्क कर रहा है, ताकि केंद्र सरकार और भारतीय दूतावासों के साथ समन्वय कर लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
कर्नाटक के लिए 1070 और 080-22253707 नंबर जारी किए गए हैं।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, राजस्थान, ओडिशा और सिक्किम ने भी अपने नागरिकों की सहायता के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम सक्रिय किए हैं।
नेपाल स्थित भारतीय दूतावास भी सक्रिय
नेपाल में मौजूद भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीय नागरिकों के लिए +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 नंबर जारी किए हैं। ये नंबर व्हाट्सऐप पर भी उपलब्ध हैं।
नेपाल में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण भारतीय अधिकारियों की प्राथमिकता फंसे हुए नागरिकों की सुरक्षित लोकेशन और स्थिति का पता लगाना है।
पहाड़ी यात्रा को लेकर मंत्री ने दी चेतावनी
नेपाल की त्रासदी पर पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने लोगों को पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन यात्रियों को पहाड़ों पर मौजूद जोखिमों को समझकर ही यात्रा करनी चाहिए।
उन्होंने खास तौर पर जुलाई और अगस्त में पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सलाह दी। साथ ही कहा कि सरकार प्रभावित लोगों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
दिलीप घोष ने यह भी कहा कि भारत प्राकृतिक आपदाओं के समय दूसरे देशों की मदद के लिए हमेशा आगे रहा है और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर, दवाइयां, एनडीआरएफ की टीमें और खोज एवं बचाव दल भेजे जाते हैं।






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