काठमांडू: नेपाल के Rasuwa-Dhading Districts में हुई भीषण आपदा को लेकर शुरुआती वैज्ञानिक आकलन सामने आया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस घटना के पीछे Earthquake नहीं, बल्कि Glacier Activity और संभावित Ice Avalanche को प्रमुख वजह माना जा रहा है। वैज्ञानिकों ने Hanging Glacier Collapse की आशंका से भी इनकार नहीं किया है।
Ice Avalanche से बनी स्थिति, फिर आई Flash Flood
Wadia Institute of Himalayan Geology (WIHG) के वैज्ञानिक डॉ. मनीष मेहता के मुताबिक, शुरुआती जानकारी से संकेत मिलता है कि ग्लेशियर के आसपास हुई गतिविधियों के कारण Ice Avalanche हुआ।
हिमखंड और बर्फ का मलबा नीचे आने के बाद उसने नदी के प्रवाह को रोक दिया और वहां अस्थायी Damming जैसी स्थिति बन गई। इससे कुछ समय के लिए पानी जमा रहा। इसके बाद अचानक पानी का बहाव बढ़ा और Flash Flood के रूप में डाउनस्ट्रीम की ओर तेजी से चला गया।
नीचे की ओर बढ़ते हुए इस पानी में अन्य नदियों का पानी भी शामिल होता गया, जिससे बाढ़ का प्रभाव और बढ़ गया।
हालांकि वैज्ञानिकों के मुताबिक, मौके पर स्थिति किसी सामान्य Glacial Lake जैसी नहीं दिखाई दे रही है।
Hanging Glacier टूटने की आशंका
डॉ. मनीष मेहता ने बताया कि लंगटांग के दूसरी तरफ, जहां से यह घटना शुरू होने की आशंका है, वहां Hanging Glacier मौजूद है। मौजूदा परिस्थितियों में ऐसे ग्लेशियर के टूटने की संभावना अधिक हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के पीछे एक से ज्यादा कारण हो सकते हैं। जिस तरह उत्तराखंड के Dharali में आपदा के दौरान अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे आया था, कुछ वैसी ही प्रक्रिया नेपाल में भी होने की संभावना की जांच की जा रही है।
Climate Change से बढ़ रहा खतरा
वैज्ञानिकों ने इस तरह की घटनाओं के बढ़ते खतरे के पीछे Climate Change को भी महत्वपूर्ण कारक बताया है।
डॉ. मेहता के अनुसार, बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं और पीछे Loose Material यानी ढीला मलबा छोड़ रहे हैं। इस मलबे की पानी सोखने की क्षमता कम होने के कारण बारिश या बर्फबारी के दौरान यह ढीला होकर नीचे गिर सकता है।
इससे नदी का प्रवाह बाधित होने के साथ-साथ Landslide, Avalanche और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं।
Earthquake को वैज्ञानिकों ने नहीं माना कारण
संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत ने बताया कि शुरुआत में इस आपदा के पीछे Earthquake को भी संभावित कारण माना जा रहा था। हालांकि बाद में उपलब्ध जानकारी और प्रारंभिक वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर भूकंप को घटना का कारण नहीं माना गया।
Glacier Collapse से बनी Natural Dam की आशंका
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर के प्रो. राकेश कुमार मैखुरी ने भी नेपाल में आई बाढ़ के पीछे Glacier Collapse और बर्फ-पत्थरों के बड़े मलबे के नदी में गिरने की आशंका जताई है।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, ग्लेशियर से टूटकर आए Ice and Rock Debris ने नदी का रास्ता रोक दिया होगा। इससे पानी जमा होकर एक अस्थायी Natural Dam या झील जैसी स्थिति बनी होगी।
बाद में जब यह प्राकृतिक अवरोध टूटा, तो बड़ी मात्रा में पानी, मिट्टी और पत्थर तेजी से नीचे की ओर बह निकले और इससे Devastating Flood जैसी स्थिति पैदा हो गई।
Himalayas में बढ़ सकता है ऐसी आपदाओं का खतरा
प्रो. मैखुरी के मुताबिक, Global Warming और बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और बर्फ की स्थिरता प्रभावित हो रही है। इससे Glacier Collapse, चट्टानों के खिसकने और Avalanche जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
हिमालय की ऊंची और खड़ी ढलानों तथा संकरी घाटियों में जब बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा अचानक नदी में गिरता है, तो बहुत कम समय में विनाशकारी बाढ़ का रूप ले सकता है।
India के Himalayan States के लिए भी Warning
राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के अनुसार, भारत में 28,043 Glacier Lakes की पहचान की गई है, जिनमें बड़ी संख्या हिमालयी क्षेत्र में स्थित है।
लगातार बदलती Climate Conditions और Global Warming के प्रभाव को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं भारत के हिमालयी राज्यों में भी सामने आ सकती हैं।
ऐसे में हिमालयी क्षेत्र में Glacier Monitoring, Early Warning System और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।


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