US Sanctions के बावजूद Iran को Rice Export जारी रहने की उम्मीद

भारत को भरोसा है कि अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे नए US Sanctions और व्यापारिक अड़चनों के बावजूद ईरान को चावल का निर्यात प्रभावित नहीं होगा। दुनिया के सबसे बड़े Rice Exporter भारत से ईरान को होने वाली चावल की सप्लाई हाल के महीनों में ऊंची कीमतों और युद्ध के कारण पैदा हुई व्यापारिक मुश्किलों के बावजूद जारी रही है।

India-Iran Trade में Rice की बड़ी हिस्सेदारी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत ने ईरान को करीब $1.25 Billion का सामान निर्यात किया। इसमें लगभग दो-तिहाई हिस्सा Rice Trade का था।

वहीं, ईरान ने भारत के कुल करीब $11.5 Billion Global Rice Exports में लगभग 7 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदी। इससे दोनों देशों के बीच Rice Trade की अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

Food Security के लिए ईरान में बनी हुई है Demand

All India Rice Exporters Association के महासचिव Ajay Bhalothia के मुताबिक, ईरान में चावल की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। ऊंची कीमतों और कई महीनों से चल रही War-Driven Trade Disruption के बावजूद ईरान खाद्य सुरक्षा यानी Food Security की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चावल खरीद रहा है।

उनका मानना है कि अमेरिका की ओर से नए प्रतिबंधों के बावजूद भारत और ईरान के बीच चावल का कारोबार जारी रह सकता है।

60 से ज्यादा Entities पर US ने लगाए Sanctions

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने सोमवार को 60 से ज्यादा Entities के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की। इसके साथ ही उन देशों के खिलाफ भी आर्थिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है, जो ईरान के साथ कारोबार करते हैं।

इसके बावजूद भारतीय Rice Exporters को उम्मीद है कि चावल जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों को मिलने वाली Humanitarian Exception और सीमित वैकल्पिक सप्लायर्स के कारण व्यापार जारी रह सकेगा।

ईरान ने खरीदा 10 लाख टन से ज्यादा Rice

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में ईरान ने 1 Million Tonnes से अधिक Rice खरीदा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 17 फीसदी ज्यादा है।

यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत देती है कि भारतीय निर्यातकों ने हाल के मुश्किल दौर में भी Shipments और Payments को जारी रखने के तरीके खोजे हैं। इससे दोनों देशों के लिए इस व्यापार को बनाए रखने की जरूरत और बढ़ गई है।

UAE, Germany और China के जरिए हो रहा Payment Settlement

Ajay Bhalothia के मुताबिक, भारतीय कारोबारियों ने ईरान के साथ व्यापारिक भुगतान के लिए सीधे Iranian Banks पर निर्भर रहने के बजाय UAE, Germany और China जैसे देशों के Financial Channels का इस्तेमाल किया है। हाल में Turkey के रास्ते भी भुगतान किया जा रहा है।

उनका कहना है कि ये वैकल्पिक Payment Channels अभी तक बिना बड़ी रुकावट के काम कर रहे हैं।

Pharmaceuticals और Tea समेत दूसरे Exports भी जारी रहने की उम्मीद

भारत से ईरान को सिर्फ चावल ही नहीं, बल्कि Pharmaceuticals, Tea, Bananas, Cereals, Bovine Meat और कुछ Chemicals का भी निर्यात होता है।

Exporters का मानना है कि इन जरूरी वस्तुओं का व्यापार भी ज्यादा प्रभावित नहीं होगा, क्योंकि इनमें से कई उत्पादों को Humanitarian Exception का फायदा मिल सकता है और इनके वैकल्पिक सप्लायर्स भी सीमित हैं।

2019 के बाद Iran से Crude Oil Import लगभग बंद

भारत ने 2019 के बाद से ईरान से Crude Oil Imports लगभग पूरी तरह बंद कर दिए थे। हालांकि इस साल अमेरिका की ओर से मिली सीमित Waivers के कारण थोड़े समय के लिए ईरानी तेल की खरीद का रास्ता खुला।

US Sanctions से पहले भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत व्यापारिक संबंध रहे हैं और Tehran भारत के प्रमुख Oil Suppliers में शामिल रहा था।

Federation of Indian Export Organizations के President S.C. Ralhan ने भी कहा कि Indian Exports to Iran पर बड़ा असर नहीं पड़ना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को होने वाला कुल निर्यात बहुत बड़ा नहीं है, फिर भी सरकार को Humanitarian Grounds पर तुरंत हस्तक्षेप करते हुए Exporters के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।

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