2008 अहमदाबाद धमाके: सुप्रीम कोर्ट ने एक दोषी की फांसी पर लगाई रोक, हाईकोर्ट के फैसले पर फिर होगी सुनवाई

2008 Ahmedabad Serial Blasts मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक दोषी की मौत की सजा के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में गुजरात सरकार को नोटिस जारी करते हुए निचली अदालत का रिकॉर्ड भी तलब किया है। यह मामला 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों से जुड़ा है, जिनमें 56 लोगों की मौत हुई थी और करीब 200 लोग घायल हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दोषी अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरलेवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। बावा ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें विशेष अदालत की ओर से सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा गया था।

गुजरात हाईकोर्ट ने बरकरार रखी थीं 38 मौत की सजाएं

7 जुलाई 2026 को Gujarat High Court ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में 38 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था। वहीं 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा भी कायम रखी गई थी।

यह मामला 2022 में विशेष अदालत के फैसले के बाद हाईकोर्ट पहुंचा था। विशेष अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था, जिनमें 38 को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद दी गई थी। हाईकोर्ट ने 2026 में इन सजाओं की पुष्टि की।

26 जुलाई 2008 को हुए थे सिलसिलेवार धमाके

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में करीब एक घंटे से ज्यादा समय के दौरान कई जगहों पर बम धमाके हुए थे। Civil Hospital, LG Hospital, बसों और अन्य स्थानों को भी निशाना बनाया गया था।

हमलों में 56 लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 200 लोग घायल हुए थे। कुछ बम ऐसे स्थानों पर भी लगाए गए थे जहां धमाकों के बाद घायलों को इलाज के लिए ले जाया जा रहा था।

78 आरोपियों के खिलाफ चला था मुकदमा

इस मामले में बड़ी संख्या में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। विशेष अदालत ने 2022 में 49 आरोपियों को दोषी करार दिया था। अभियोजन पक्ष ने मामले को Indian Mujahideen और प्रतिबंधित SIMI से जुड़े आरोपियों के साथ जोड़ा था।

अलग-अलग FIRs को एक साथ जोड़कर इस मामले की सुनवाई की गई थी। इसमें अहमदाबाद में हुए धमाकों के साथ-साथ सूरत में मिले कथित जिंदा बमों से जुड़े मामले भी शामिल थे।

अब सुप्रीम कोर्ट में होगी मौत की सजा की समीक्षा

गुजरात हाईकोर्ट द्वारा मौत की सजा बरकरार रखे जाने के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने संबंधित दोषी की याचिका पर गुजरात सरकार से जवाब मांगा है और निचली अदालत का रिकॉर्ड तलब किया है।

इसका मतलब है कि Death Penalty के मामले में सुप्रीम कोर्ट अब रिकॉर्ड और याचिका में उठाए गए मुद्दों पर सुनवाई करेगा। फिलहाल संबंधित दोषी की फांसी पर रोक है।

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान मौत की सजा पर रोक लगाने के लिए अलग से आवेदन की व्यवस्था भी न्यायालय के रिकॉर्ड में मौजूद है।

2008 अहमदाबाद ब्लास्ट केस में अब तक क्या हुआ?

  • 26 जुलाई 2008: अहमदाबाद में सिलसिलेवार बम धमाके।
  • 56 लोगों की मौत: करीब 200 लोग घायल हुए।
  • फरवरी 2022: विशेष अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया।
  • 38 दोषियों को: मौत की सजा सुनाई गई।
  • 11 दोषियों को: उम्रकैद की सजा दी गई।
  • 7 जुलाई 2026: गुजरात हाईकोर्ट ने सभी 38 मौत की सजाएं और 11 उम्रकैद की सजाएं बरकरार रखीं।
  • अब: सुप्रीम कोर्ट ने एक दोषी की फांसी पर फिलहाल रोक लगाकर मामले में रिकॉर्ड तलब किया है।

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