Nepal Flood Rescue: भीषण बाढ़ और Landslide के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे 900 से अधिक कर्मचारियों को निकालने के लिए Rescue Operation जारी है। Trishuli-3A Project में बचाव दल ने सुरंग तक पहुंचने के लिए छोटा रास्ता बनाया है।
नेपाल में आई भीषण Flood और Landslide के बाद बड़े पैमाने पर Rescue Operation चलाया जा रहा है। देश की अलग-अलग Hydropower Projects की सुरंगों में 900 से अधिक कर्मचारियों के फंसे या लापता होने की आशंका है। इनमें सबसे बड़ी चुनौती Upper Trishuli-3A Hydropower Project की सुरंग में फंसे कर्मचारियों और इंजीनियरों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
बचाव दल लगातार Drilling, Excavation और Controlled Blasting की मदद से सुरंग तक पहुंचने का रास्ता बनाने में जुटा है। नेपाली सेना के अनुसार, संयुक्त टीम सुरंग के मुख्य हिस्से तक पहुंचने में कामयाब हुई है। करीब 90 सदस्यीय टीम इस Rescue Mission में लगी है, जिसमें नेपाली सेना, Armed Police Force और Nepal Police के जवानों के साथ प्रशिक्षित खोज एवं बचाव विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
Trishuli-3A Tunnel में बनाया गया छोटा रास्ता
बचाव दल ने रविवार दोपहर करीब 2 बजे सुरंग के ऊपरी हिस्से यानी Crown Head तक पहुंच बनाई। यहां लगभग 2×3 फीट का एक छोटा रास्ता तैयार किया गया। इसके बाद Rescue Team ने रस्सियों की मदद से सुरंग के भीतर जाने की कोशिश की और अंदर मौजूद लोगों को आवाज देकर संपर्क करने का प्रयास किया।
हालांकि, अभी तक सुरंग के अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इसके बाद बचाव दल ने रास्ते को और चौड़ा करने का काम तेज कर दिया। भारी मशीनों और Controlled Explosives की मदद से सुरंग के भीतर सुरक्षित रास्ता बनाने का प्रयास जारी है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि प्रवेश मार्ग पूरी तरह खुलने के बाद अंदर फंसे लोगों की तलाश और Evacuation Operation में तेजी आएगी।
Tunnel के अंदर पहुंचाई गई Oxygen और Food
बचाव अभियान में सबसे अहम प्राथमिकता सुरंग के अंदर फंसे लोगों तक Oxygen और Essential Supplies पहुंचाना है। अधिकारियों के मुताबिक, एक Vertical Passage के जरिए पहले ही ऑक्सीजन अंदर भेजी जा चुकी है।
इसके अलावा अंदर की स्थिति का पता लगाने के लिए Camera भी भेजा गया है। Rescue Team लगातार सुरंग के भीतर मौजूद लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है। अभी तक किसी व्यक्ति से सीधा संपर्क नहीं हो पाया है, लेकिन बचाव दल को लोगों के सुरक्षित होने की उम्मीद है।
900 से ज्यादा Hydropower Workers Missing
नेपाल की अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 900 से अधिक कर्मचारियों के इस आपदा के बाद लापता होने की सूचना है। आशंका है कि इनमें बड़ी संख्या में लोग Tunnels के अंदर फंसे हो सकते हैं।
Rescue Operation में सबसे बड़ी बाधाएं भारी मलबा, तेज नदी का बहाव और लगातार बदलता Weather Condition हैं। इन चुनौतियों के बावजूद सुरक्षा बल और विशेषज्ञ टीमें लगातार सुरंगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
Helicopter से पहुंचाई गई Heavy Machinery
बाढ़ के कारण Hydropower Project तक पहुंचने वाली सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसके चलते भारी Rescue Machinery को घटनास्थल तक ले जाना मुश्किल हो गया।
स्थिति को देखते हुए नेपाली सेना ने Excavators और Bulldozers को अलग-अलग हिस्सों में तैयार किया और उन्हें Helicopter की मदद से नुवाकोट के बट्टार तक पहुंचाया। इसके बाद मशीनों को परियोजना स्थल तक ले जाया गया। इन उपकरणों की मदद से मलबा हटाने और सुरंग का रास्ता खोलने का काम जारी है।
Rain और Rising River Level ने बढ़ाई मुश्किल
Rescue Operation के दौरान खराब मौसम और नदी का बढ़ता जलस्तर बड़ी चुनौती बना हुआ है। शनिवार रात हुई बारिश के बाद नदी का पानी बढ़ गया और सुरंग के पास चल रहे Excavation Area में पानी भर गया।
इससे कुछ समय के लिए बचाव अभियान प्रभावित हुआ। पानी कम होने के बाद टीम ने दोबारा Drilling Machines, Excavators और Hydraulic Cutters की मदद से सुरंग का प्रवेश मार्ग तलाशना शुरू किया।
सेना के अधिकारियों के मुताबिक, तेज नदी के बहाव और कठिन परिस्थितियों के बावजूद संयुक्त Rescue Team लगातार काम कर रही है।
Nepal में 752 मौतें, 2,500 से ज्यादा लोग Missing
इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, मृतकों की संख्या 752 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 2,502 लोग Missing बताए जा रहे हैं।
राहत और बचाव कार्यों में करीब 20,000 Security Personnel तैनात किए गए हैं। अब तक लगभग 8,730 लोगों को Rescue किया जा चुका है। लापता लोगों में जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 933 Hydropower Workers भी शामिल बताए गए हैं।
Glacier टूटने से शुरू हुई तबाही
रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को हिमालयी क्षेत्र में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा टूट गया। इसके बाद बड़ी मात्रा में चट्टान और मलबा नीचे आया और तेज बहाव के साथ लेंदे नदी में जा मिला।
इसके कारण पानी और मलबे का भारी सैलाब Rasuwa, Nuwakot और Dhading जिलों की तरफ बढ़ा। कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। त्रिशूली नदी का जलस्तर महज 30 मिनट में करीब 9 मीटर तक बढ़ गया।
शुरुआती रिपोर्ट में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने घटना को Earthquake से जोड़ने की संभावना जताई थी, लेकिन बाद की जांच में सामने आया कि दर्ज किया गया Seismic Signal खुद Landslide के कारण पैदा हुआ था।
Tibet में भी भारी नुकसान
इस आपदा का प्रभाव नेपाल तक सीमित नहीं रहा। चीन के Tibet Region में भी भारी नुकसान की खबर है। चीनी अधिकारियों के अनुसार वहां कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि 546 लोग Missing बताए गए हैं।
लापता लोगों में अलग-अलग देशों के नागरिक भी शामिल हैं। इनमें 104 नेपाली, 49 भारतीय, 33 लातवियाई, 18 अमेरिकी और 15 ब्रिटिश नागरिक बताए गए हैं।
India समेत कई देशों ने की मदद की पेशकश
नेपाल में जारी Relief and Rescue Operation के लिए कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सहायता की पेशकश की है। India, USA, Australia, South Korea, United Nations और Red Cross समेत कई संस्थाएं राहत कार्यों में सहयोग कर रही हैं।
अमेरिका और कनाडा ने 3.6-3.6 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता की घोषणा की है। वहीं ब्रिटेन ने करीब 6.8 मिलियन डॉलर, संयुक्त राष्ट्र ने 2.5 मिलियन डॉलर और यूरोपीय संघ ने करीब 2.3 मिलियन डॉलर की सहायता का ऐलान किया है।
नेपाल सरकार ने Rescue Operation के लिए विशेषज्ञ सहायता के उद्देश्य से भारत और चीन से भी सहयोग मांगा है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता Hydropower Project Tunnels में फंसे लोगों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।



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