भारत की 114 राफेल खरीद योजना: क्यों है इसकी जरूरत?

भारत अपनी Air Force की ताकत बढ़ाने के लिए फ्रांस से 114 Rafale Fighter Jets खरीदने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित डील की अनुमानित कीमत करीब ₹3.25 lakh crore बताई जा रही है। फ्रांस की Dassault Aviation ने भारत के Letter of Request (LoR) के जवाब में अपना Technical and Commercial Proposal सौंप दिया है।

यह प्रस्ताव भारतीय वायुसेना के लिए नए लड़ाकू विमानों की खरीद की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फरवरी में Defence Acquisition Council (DAC) ने इस खरीद को Acceptance of Necessity (AoN) की मंजूरी दी थी। आगे की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इस सौदे को Cabinet Committee on Security (CCS) की अंतिम मंजूरी मिलनी होगी।

आखिर 114 राफेल की जरूरत क्यों पड़ी?

भारतीय वायुसेना लंबे समय से Fighter Squadron Shortage का सामना कर रही है। दूसरी ओर, स्वदेशी Tejas Mk-2 और Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) जैसे प्रोजेक्ट्स के तैयार होने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।

ऐसे में 114 राफेल विमानों की खरीद को केवल मौजूदा फाइटर फ्लीट बढ़ाने की योजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। ये विमान भारत की तत्काल Combat Capability को मजबूत करने के साथ-साथ मौजूदा और भविष्य की स्वदेशी Fighter Force के बीच एक अहम कड़ी का काम कर सकते हैं।

फ्रांस का क्या है प्रस्ताव?

प्रस्ताव के मुताबिक कुल 114 विमानों में से 18 Rafale Jets फ्रांस से सीधे Fly-Away Condition में भारत को मिलेंगे। बाकी 96 Aircraft का निर्माण या असेंबली भारत में की जाएगी।

इससे 80% से अधिक Rafale Jets की असेंबली देश में ही होने की संभावना है। उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ Indigenous Content भी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती स्तर पर यह करीब 30% हो सकता है, जिसे आगे चलकर 60%+ तक ले जाने की उम्मीद है।

स्वदेशी हथियारों और तकनीक पर भी जोर

भारतीय वायुसेना की जरूरत में 88 Single-Seat और 26 Twin-Seat Fighter Jets शामिल हैं। इन विमानों की असेंबली और System Integration के लिए Dassault Aviation भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझेदारी कर सकती है।

भारत की ओर से यह भी जोर दिया गया है कि नए राफेल में Indigenous Weapons and Systems को शामिल करने की क्षमता हो। इसके अलावा Secure Data Link जैसी तकनीक भी महत्वपूर्ण होगी, जिससे लड़ाकू विमान भारतीय Radars, Sensors और अन्य Battlefield Networks से सुरक्षित तरीके से जुड़ सकें।

कुल मिलाकर, प्रस्तावित Rafale Deal का मकसद सिर्फ लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि भारतीय वायुसेना की मौजूदा Operational CapabilityTechnology Transfer और Defence Manufacturing को एक साथ मजबूत करना भी है।

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