
IIT Madras के निदेशक V. Kamakoti एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में हैं। उन्हें हाल ही में National Testing Agency (NTA) Reform Task Force का सदस्य बनाया गया है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। हालांकि, उनकी नियुक्ति के साथ ही उनके पुराने Gaumutra संबंधी बयान को लेकर राजनीतिक विवाद भी फिर से शुरू हो गया है।
NTA Reform Task Force में मिली अहम जिम्मेदारी
हालिया छात्र आंदोलनों और NEET Paper Leak विवाद के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय Task Force का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता Infosys के सह-संस्थापक Nandan Nilekani कर रहे हैं। टीम में पूर्व ISRO Chairman S. Somanath, पूर्व IB Director Tapan Deka और V. Kamakoti सहित छह सदस्य शामिल हैं।
परीक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी चुनौती क्या?
एक बातचीत में Kamakoti ने कहा कि भारत में सार्वजनिक परीक्षाओं की सबसे बड़ी चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि Trust यानी भरोसे की है। उनके अनुसार, NEET जैसी परीक्षाओं में लाखों छात्र शामिल होते हैं और प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर विभिन्न भाषाओं में अनुवाद तक कई लोगों की भूमिका होती है। यदि इस प्रक्रिया में एक भी व्यक्ति समझौता करता है, तो पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि Artificial Intelligence (AI) निगरानी और सुरक्षा में मदद कर सकती है, लेकिन प्रश्नपत्र तैयार करने जैसे संवेदनशील कार्य पूरी तरह तकनीक के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते।
Gaumutra Remark को लेकर विवाद
V. Kamakoti पहले भी अपने एक बयान को लेकर विवादों में रहे हैं। वर्ष 2025 में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक संत की कथा का उल्लेख किया था, जिसमें Cow Urine (Gaumutra) से बुखार ठीक होने का जिक्र था। इस बयान की कई वैज्ञानिकों और विपक्षी नेताओं ने आलोचना की और इसे Pseudoscience बताया।
हालांकि, उनके आलोचकों के बावजूद ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया कि उन्होंने IIT Madras में इस विषय पर कोई वैज्ञानिक शोध किया हो या अपने प्रशासनिक निर्णयों में निजी मान्यताओं को प्रभावी बनाया हो।
Shakti Processor से बनाई अलग पहचान
Kamakoti को भारत के स्वदेशी Chip Design Programme को आगे बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है। उनके नेतृत्व में IIT Madras ने Shakti Processor विकसित किया, जिसे भारत के पहले स्वदेशी Microprocessor Projects में गिना जाता है। इन प्रोसेसर का उपयोग रक्षा, सरकारी संस्थानों, सर्वर और शोध कार्यों में किया जा रहा है।
IIT Madras को दिलाई नई ऊंचाइयां
वर्ष 2022 में निदेशक बनने के बाद उनके नेतृत्व में IIT Madras ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। संस्थान ने Zanzibar में अपना पहला Offshore Campus शुरू किया और लगातार NIRF Rankings में देश का शीर्ष शिक्षण संस्थान बना रहा।
उन्होंने बताया कि संस्थान में हर वर्ष सैकड़ों Patents, Research Projects और Startups पर काम हो रहा है। उनके अनुसार, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए ₹1,000 Crore Startup Fund की भी तैयारी की जा रही है।
JEE में असफल होने के बाद बने JEE Chairman
V. Kamakoti की सबसे प्रेरक बात यह है कि वे खुद एक समय IIT-JEE परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे। उन्होंने स्वीकार किया कि 1985 में Chemistry में बेहद कम अंक आने के कारण उनका चयन नहीं हुआ।
बाद में उन्होंने Sri Venkateswara College of Engineering से पढ़ाई की और फिर IIT Madras से Master’s तथा PhD पूरी की। आगे चलकर वे उसी संस्थान में प्रोफेसर बने और बाद में JEE Chairman तथा IIT Madras Director जैसे महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे।
नहीं बनवाया Passport, भारत में ही रहने का लिया संकल्प
Kamakoti ने एक साक्षात्कार में बताया था कि छात्र जीवन में अपने आध्यात्मिक गुरु की सलाह के बाद उन्होंने भारत में रहकर ही देश की सेवा करने का संकल्प लिया। इसी वजह से उन्होंने कभी Passport नहीं बनवाया और विदेश जाकर बसने के बजाय भारत में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में योगदान देना चुना।
शोध से प्रशासन तक का सफर
Computer Science के शोधकर्ता के रूप में करियर शुरू करने वाले Kamakoti बाद में शिक्षा प्रशासन की जिम्मेदारियों में आए। वे National Security Advisory Board के सदस्य रह चुके हैं और Ministry of Commerce and Industry की Artificial Intelligence Task Force की अध्यक्षता भी कर चुके हैं। अब NTA Reform Task Force में उनकी विशेषज्ञता का उपयोग भारत की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए किया जाएगा।

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