Chamoli Tunnel Landslide: 7 मजदूरों की मौत, 3 अब भी लापता; CM धामी ने किया घटनास्थल का दौरा

Chamoli Tunnel Landslide: उत्तराखंड के चमोली जिले में Vishnugad-Pipalkoti Hydroelectric Project की निर्माणाधीन टनल में पानी और भारी मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में अब तक 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 3 मजदूर अभी लापता बताए जा रहे हैं। 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

यह हादसा गुरुवार शाम हुआ, जब अचानक टनल के अंदर पानी और मलबे का तेज बहाव आ गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक उस समय टनल में 22 श्रमिक मौजूद थे। पानी और मलबा बढ़ने के कारण बचाव दल के लिए अंदर तक पहुंच बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया।

CM पुष्कर सिंह धामी ने किया घटनास्थल का दौरा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने शुक्रवार को चमोली पहुंचकर हादसे की स्थिति और Rescue Operation का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को बचाव अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और उपलब्ध संसाधनों व तकनीकी विशेषज्ञता का प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने बचाव अभियान में जुटी NDRF, SDRF, ITBP और Police टीमों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने और टनल में फंसे श्रमिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने के निर्देश दिए।

मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की सहायता

मुख्यमंत्री धामी ने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों को ₹4-4 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

हादसे में मारे गए श्रमिकों की पहचान में उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ के मजदूर भी शामिल हैं।

तीन मजदूर अब भी लापता

शुक्रवार दोपहर तक सामने आई सूची के अनुसार लुकास टोपनो, चेतन पोयाम और देवनाथ लापता हैं। बचाव दल इन तीनों की तलाश में जुटा हुआ है।

अधिकारियों के मुताबिक पानी का रिसाव और मलबा लगातार चुनौती पैदा कर रहा है। हादसे के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। शुरुआती रिपोर्टों में Landslide और Water Ingress को हादसे की संभावित वजह बताया गया है।

1.50 किलोमीटर हिस्से में आया मलबा और पानी

प्रोजेक्ट की करीब 3 किलोमीटर लंबी Tail Race Tunnel (TRT) में लगभग 1.50 किलोमीटर के हिस्से में भूधंसाव के बाद मलबा और पानी आने की स्थिति बनी।

THDC India Limited इस 444 MW Vishnugad-Pipalkoti Hydro Electric Project को विकसित कर रही है, जबकि टनल निर्माण का काम Hindustan Construction Company (HCC) कर रही है।

SDRF और NDRF का Rescue Operation जारी

हादसे के बाद NDRF और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। इनके साथ जिला प्रशासन, पुलिस और ITBP की टीमें भी राहत एवं बचाव अभियान में लगी हैं।

रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टनल में बढ़ता पानी और मलबा है। इसके बावजूद बचावकर्मी लापता तीन श्रमिकों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

हादसे ने फिर उठाए Tunnel Safety पर सवाल

हिमालयी क्षेत्र में बड़े Infrastructure Projects के दौरान भूगर्भीय अस्थिरता और अचानक पानी आने जैसी चुनौतियां लगातार बनी रहती हैं। चमोली का यह हादसा एक बार फिर Tunnel Safety और Construction Safety Standards को लेकर सवाल खड़े करता है।

फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान लापता श्रमिकों को सुरक्षित निकालने और हादसे के कारणों की जांच पर है। बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही दुर्घटना के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की विस्तृत तस्वीर सामने आएगी।

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