जालंधर: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में 26 और 27 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में नया मोड़ सामने आया है। छात्रा रम्या मिश्रा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मोहम्मद फरहत देव पर DSW Office में कथित तोड़फोड़ और प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी पुलिस या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है।
मामला कथित दुष्कर्म से जुड़ी एक Social Media Post के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद यूनिवर्सिटी परिसर में प्रदर्शन, तोड़फोड़, आगजनी और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। अब पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के लिए CCTV Footage, सोशल मीडिया वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान खंगाल रही है।
कौन हैं फरहत देव?
मोहम्मद फरहत देव करीब दो साल पहले LPU से अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। छात्रा के आरोपों के बाद उनकी भूमिका भी पुलिस जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फरहत हिंसा के दौरान यूनिवर्सिटी परिसर में क्यों पहुंचे और घटनाओं के दौरान उनकी वास्तविक भूमिका क्या थी।
छात्रा रम्या मिश्रा ने क्या आरोप लगाए?
रम्या मिश्रा ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान DSW Office में प्रवेश करने वाला पहला व्यक्ति फरहत देव था। उनके मुताबिक, इसके बाद कुछ अन्य लोग कार्यालय के अंदर पहुंचे और वहां तोड़फोड़ की गई।
छात्रा ने कार्यालय में रखी ट्रॉफियों और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाए जाने का भी दावा किया। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि फरहत ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों के बीच माहौल को भड़काने का काम किया।
हालांकि, छात्रा की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
फरहत देव ने आरोपों पर क्या कहा?
रम्या मिश्रा के आरोप सामने आने के बाद फरहत देव ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी सफाई दी। उन्होंने DSW Office में तोड़फोड़ करने और ट्रॉफियां तोड़ने के आरोपों से इनकार किया।
फरहत के मुताबिक, वह कार्यालय के अंदर गए थे, लेकिन उनका उद्देश्य तोड़फोड़ करना नहीं था। उनका दावा है कि वह वहां मौजूद भीड़ को रोकने और लोगों को अलग करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उन कामों के लिए धमकियां मिल रही हैं, जो उन्होंने किए ही नहीं।
SSP ने कहा- फरहत की भूमिका भी जांच के दायरे में
कपूरथला के SSP Gaurav Thura ने कहा कि पुलिस सोशल मीडिया पर सामने आई सूचनाओं और दावों की भी जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर कथित दुष्कर्म और कार्रवाई नहीं होने से संबंधित जो संदेश प्रसारित हुआ था, उसकी भी जांच की जा रही है।
SSP के मुताबिक, मोहम्मद फरहत की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि करीब दो साल पहले यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी कर चुका फरहत परिसर में कैसे पहुंचा, क्यों पहुंचा और हिंसा के दौरान उसकी क्या भूमिका रही।
पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
LPU के Uni Mall में लूटपाट की भी जांच
26-27 सितंबर के बवाल के दौरान Uni Mall में हुई कथित लूटपाट भी पुलिस की जांच का हिस्सा है। कई दुकानों के शटर और शीशे तोड़े जाने तथा मोबाइल, लैपटॉप और अन्य Electronic Items ले जाने की घटनाएं सामने आई हैं।
पुलिस मॉल के अंदर और बाहर लगे CCTV Cameras की फुटेज खंगाल रही है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कौन लोग दुकानों में दाखिल हुए, किसने सामान उठाया और किन वाहनों से उसे बाहर ले जाया गया।
पुलिस आसपास के इलाकों की फुटेज और अन्य साक्ष्यों को भी आपस में जोड़कर घटनाक्रम की जांच कर रही है।
मामले में अब तक चार FIR दर्ज
LPU Violence Case में पुलिस अब तक चार अलग-अलग FIR दर्ज कर चुकी है। मामले की जांच के लिए गठित SIT सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ रही है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर सूचना फैलने के बाद भीड़ किस तरह बढ़ी और इसके बाद तोड़फोड़, आगजनी तथा लूटपाट की घटनाएं कैसे हुईं।
छात्रों के जाने के बाद कैंपस के बाहर पसरा सन्नाटा
हिंसा के बाद यूनिवर्सिटी में 10 दिन की छुट्टी घोषित किए जाने और परीक्षाएं स्थगित होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र अपने घर लौट गए हैं। इसका असर कैंपस के आसपास की दुकानों पर भी पड़ा है।
कई खाने-पीने की दुकानें बंद हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पहले यहां छात्रों की वजह से काफी चहल-पहल रहती थी, लेकिन छुट्टियों के कारण ग्राहक नहीं हैं।
दुकानदारों के मुताबिक, 27 सितंबर की रात करीब साढ़े नौ बजे दुकानें बंद करते समय स्थिति सामान्य थी। अगले दिन पुलिस ने सुबह दुकानें खोलने की अनुमति नहीं दी। बाद में दोपहर करीब दो बजे दुकानें खोलने की अनुमति मिली, लेकिन शाम करीब साढ़े सात बजे दोबारा बंद करने के निर्देश दिए गए।
दुकानदारों ने बताया कि दुकानें बंद करके लौटते समय उन्होंने लाठीचार्ज और वाहनों में आगजनी की घटनाएं देखीं। इसके बाद उनमें डर का माहौल है और कई दुकानदार छुट्टियां खत्म होने तक दुकानें बंद रखने पर विचार कर रहे हैं।




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