विकास पथ पर बढ़ता भारत: युवा सामर्थ्य को राष्ट्र की प्रगति का आधार मानते हुए प्रधानमंत्री ने दी सीख

नई दिल्ली, 10 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कठिन परिस्थितियों में शांत रहने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने के महत्व को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा कि देश के युवा जो ठान लेते हैं, उसे करके दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि युवाशक्ति का सामर्थ्य ही है, जो राष्ट्र को तेज गति से विकास के पथ पर आगे बढ़ा रहा है।

प्रधानमंत्री ने यह सुभाषित साझा किया

“व्यसने वाऽर्थकृच्छ्रे वा भये वा जीवनान्तके।

विमृशन् वै स्वया बुद्ध्या धृतिमान् नावसीदति॥”

इस सुभाषित का अर्थ है कि विपत्ति, आर्थिक संकट, भय या जीवन के अंतिम क्षणों जैसी कठिन परिस्थितियों में जो व्यक्ति धैर्य बनाए रखते हुए अपनी बुद्धि से विचार करता है, वह कभी विचलित नहीं होता। शांत और सोच-समझकर लिए गए निर्णय व्यक्ति को दुःख और हानि से बचाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संदेश मानसिक दृढ़ता और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को दर्शाता है।

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