नियमितीकरण को और अधिक पारदर्शी बनाने पर हुई चर्चा, 2024-25 के पात्र कर्मचारियों को शामिल करने पर सीएम का धन्यवाद

शिमला। हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को महासंघ के अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर की अगुवाई में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश बजट में कर्मचारियों के नियमितीकरण को वर्ष में दो बार मार्च और सितंबर करने की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

महासंघ ने इस फैसले को कर्मचारी हित में दूरदर्शी और महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इससे हजारों कर्मचारियों को स्थायित्व और सुरक्षा का लाभ मिलेगा, साथ ही उनका मनोबल भी बढ़ेगा। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के साथ पहले सौंपे गए ज्ञापन के विभिन्न मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। महासंघ ने संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही वर्ष 2024 और 2025 में नियमितीकरण के लिए पात्र होने वाले कर्मचारियों को भी इस व्यवस्था में शामिल करने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया।

बैठक के दौरान महासंघ ने सरकार के सामने कुछ लंबित मांगें भी रखीं। इनमें रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरना, वेतन आयोग के लंबित बकाये का भुगतान और महंगाई भत्ते की जल्द अदायगी जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल रहे।

महासंघ ने उम्मीद जताई कि इन मांगों पर भी सरकार जल्द सकारात्मक फैसला लेकर कर्मचारियों को राहत देगी। इस अवसर पर कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉइज यूनियन की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 हजार रुपये की राशि का योगदान भी दिया गया। महासंघ ने इसे कर्मचारियों की समाज और सरकार के प्रति सकारात्मक सोच और सहभागिता का प्रतीक बताया। महासंघ के महासचिव भरत शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और कर्मचारियों के हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चरणबद्ध तरीके से सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे। महासंघ के मुख्य संरक्षक एम.आर. वर्मा ने भी मुख्यमंत्री के कर्मचारी हितैषी दृष्टिकोण की सराहना की और विश्वास जताया कि भविष्य में भी सरकार कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े फैसलों को प्राथमिकता देगी।

महासंघ ने कर्मचारियों को वेतन सहित दो वर्ष की स्टडी लीव देने के फैसले के लिए भी मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि इससे कर्मचारियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता और सेवा गुणवत्ता में सुधार होगा।

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