
Delhi Excise Policy Case: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia ने आबकारी नीति मामले में उन्हें आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ CBI की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।
दोनों नेताओं ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर CBI Revision Petition की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जांच एजेंसी ने विशेष अदालत के फैसले के कुछ ही घंटे बाद बेहद जल्दबाजी में याचिका दाखिल की और इसमें उनके खिलाफ एजेंसी का मामला स्पष्ट नहीं है।
चार घंटे के भीतर याचिका दाखिल करने का आरोप
केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से दाखिल याचिकाओं में कहा गया है कि CBI ने विशेष न्यायाधीश के Discharge Order के करीब चार घंटे के भीतर ही पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर दी थी।
याचिकाओं में दावा किया गया कि विशेष अदालत का फैसला 500 से अधिक पन्नों का था। ऐसे में इतनी कम अवधि में फैसले में दर्ज निष्कर्षों और कारणों का गंभीरता से अध्ययन किए बिना याचिका दाखिल की गई।
दोनों नेताओं ने इसे “Hasty and Non-Serious” Petition बताते हुए कहा कि अगर ऐसी याचिका को सुनवाई योग्य माना जाता है तो उन्हें गंभीर prejudice का सामना करना पड़ सकता है।
CBI की याचिका की Maintainability पर सवाल
केजरीवाल और सिसोदिया ने अपनी अलग-अलग अर्जियों में CBI की याचिका की Maintainability पर भी सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि पुनरीक्षण याचिका में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विशेष अदालत के आदेश में ऐसी कौन-सी गंभीर कानूनी या प्रक्रियात्मक गलती है, जिसके आधार पर उसे चुनौती दी जा रही है।
याचिकाओं में यह भी कहा गया कि निचली अदालत ने मामले की तीन महीने से अधिक समय तक विस्तार से सुनवाई की थी और उसके बाद सभी आरोपियों को आरोपमुक्त किया था।
27 फरवरी के Discharge Order को चुनौती
CBI ने विशेष अदालत के 27 February Order को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। जांच एजेंसी की याचिका में निचली अदालत द्वारा आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं।
वहीं, केजरीवाल और सिसोदिया का कहना है कि CBI ने ऐसा कोई विशेष निष्कर्ष नहीं बताया है जिसे निचली अदालत ने गलत तरीके से दर्ज किया हो या जिसमें कोई स्पष्ट Irregularity हुई हो।
17 और 18 अगस्त को होगी सुनवाई
इस मामले में Delhi High Court में 17 और 18 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित है। न्यायमूर्ति Manoj Jain CBI की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करेंगे।
पिछली सुनवाई में अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और Durgesh Pathak को CBI की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम दो सप्ताह का समय दिया था।
अब हाई कोर्ट के सामने मुख्य सवालों में यह शामिल होगा कि CBI की पुनरीक्षण याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं और निचली अदालत के आरोपमुक्त करने के आदेश में हस्तक्षेप की कोई कानूनी वजह बनती है या नहीं।
मामले में हाई कोर्ट का अगला फैसला आबकारी नीति मामले में आरोपमुक्त किए गए नेताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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