Shivratri 2026: 135 साल बाद बने दुर्लभ संयोग, शिवालयों में उमड़ा भक्तों का सैलाब; हर-हर महादेव से गूंजे मंदिर

Sawan Shivratri: Gajkesari Yog समेत कई शुभ संयोग, सुबह से मंदिरों में जलाभिषेक के लिए लगी कतारें

Shivratri 2026: सावन की Shivratri के अवसर पर मंगलवार को उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। मंदिर परिसर ‘Har Har Mahadev’ और ‘Bol Bam’ के जयकारों से गूंजते रहे। भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।

इस बार Sawan Shivratri को लेकर ज्योतिषाचार्य कई विशेष ग्रह-नक्षत्रों के संयोग की बात कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस शिवरात्रि पर Gajkesari Yog, Guru Aditya Yog, Budh Aditya Yog और Panchgrahi Yog जैसे संयोग बन रहे हैं।

135 साल बाद बन रहे ऐसे दुर्लभ संयोग!

ज्योतिष विशेषज्ञों के मुताबिक, इस वर्ष की श्रावण शिवरात्रि कई ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति के बीच पड़ रही है। दावा किया जा रहा है कि करीब 135 Years बाद इस तरह के दुर्लभ संयोग देखने को मिल रहे हैं।

इस दौरान Mangal, Guru, Shani और Chandra का विशेष प्रभाव रहने की बात कही जा रही है। साथ ही मंगलवार का दिन होने के कारण भी इस पर्व का धार्मिक महत्व बढ़ गया है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, Pushya Nakshatra के स्वामी Shani माने जाते हैं, जबकि Cancer (Kark Rashi) के स्वामी Chandra हैं। वहीं, Jupiter यानी Guru की स्थिति भी चंद्रमा के साथ शुभ मानी जा रही है।

Gajkesari Yog और Panchgrahi Yog का विशेष संयोग

इस बार Shivratri पर बनने वाले Gajkesari Yog को ज्योतिष में शुभ माना जाता है। इसके अलावा Guru Aditya Yog और Budh Aditya Yog भी बनने की बात कही गई है।

वहीं, Panchgrahi Yog के कारण भी इस बार की शिवरात्रि को विशेष बताया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे शुभ संयोगों में भगवान शिव की पूजा और उपासना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

Bhadra का भी रहेगा प्रभाव

हालांकि, इस बार Shivratri पर Bhadra की स्थिति भी रहेगी। दी गई पंचांग गणना के अनुसार, Chaturdashi Tithi 11 अगस्त को सुबह करीब 4:55 AM से शुरू हुई और इसी समय से Bhadra भी शुरू होकर दोपहर 3:25 PM तक रहने की बात कही गई है।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, Mrityu Lok Bhadra के दौरान कुछ शुभ कार्य और जलाभिषेक करना शास्त्रसम्मत नहीं माना जाता। ऐसे में श्रद्धालुओं को Bhadra समाप्त होने के बाद भगवान शिव का Jalabhishek करना अधिक शुभ बताया गया।

शिवालयों में सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Sawan Shivratri को लेकर उत्तराखंड के विभिन्न Shiva Temples में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। श्रद्धालु गंगाजल, दूध और जल लेकर मंदिरों में पहुंचे और भगवान शिव का अभिषेक किया।

कई मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में लगातार ‘Har Har Mahadev’ और ‘Bol Bam’ के जयकारे सुनाई देते रहे।

Jalabhishek और Belpatra चढ़ाने का विशेष महत्व

आचार्य Rakesh Shukla के अनुसार, Shivratri के दिन भगवान शिव का जल से अभिषेक करने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

उन्होंने बताया कि श्रद्धालु भगवान शिव को Belpatra, Bhang, Dhatura और अन्य प्रिय वस्तुएं अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन वस्तुओं को भगवान शिव की पूजा में विशेष स्थान दिया गया है।

श्रद्धालुओं ने शिवालयों में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान भोलेनाथ से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।

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