
Rajasthan के पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में Cesarean Delivery (C-Section) के बाद हुई 20 प्रसूताओं की मौत और 10 महिलाओं की Kidney खराब होने के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। बढ़ते विवाद के बीच राज्य सरकार ने गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए नई Guidelines जारी की हैं।
पांच प्रसूताओं ने मांगी इच्छामृत्यु
Kota Medical College Hospital में भर्ती पांच प्रसूताओं में से रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी और सुशीला ने अस्पताल से बाहर आकर मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बयां की। इन महिलाओं की Cesarean Delivery के बाद Kidney खराब हो गई थी और वे पिछले करीब दो महीने से Nephrology Ward में भर्ती हैं। उनका लगातार Dialysis किया जा रहा है।
प्रसूताओं ने कहा कि सरकार या तो उनका Kidney Transplant करवाए या फिर उन्हें Euthanasia (इच्छा मृत्यु) की अनुमति दी जाए। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम भेजे गए ज्ञापन में कहा कि लगातार Dialysis के दौरान उन्हें असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है।
Dialysis कराने से किया इनकार
पांचों महिलाओं ने Dialysis कराने से भी इनकार कर दिया। इससे पहले उनके परिजनों ने District Collector को ज्ञापन देकर सरकारी खर्च पर Kidney Transplant कराने की मांग की थी। परिजनों का कहना है कि यदि ट्रांसप्लांट संभव नहीं है तो उन्हें इस पीड़ा से मुक्ति दिलाई जाए।
जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल
घटना के बाद Medical Minister, Principal Secretary (Medical) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित जिलों का दौरा कर चुके हैं। हालांकि, सरकार द्वारा गठित Inquiry Committee अभी तक अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंप सकी है।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक रिपोर्ट में Kota Medical College के प्राचार्य Dr. Nilesh Jain के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी, लेकिन विभाग ने केवल अस्पताल अधीक्षक को नोटिस जारी किया। वहीं Bikaner Medical College के प्राचार्य Dr. Surendra Kumar Verma के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी लागू नहीं की गई।
सरकार ने जारी की नई Guidelines
मई के अंतिम सप्ताह से लेकर 15 जुलाई तक लगातार सामने आए मामलों के बाद Rajasthan Government ने नई Guidelines जारी की हैं।
नई व्यवस्था के तहत:
- सभी गर्भवती महिलाओं की नियमित Health Screening होगी।
- Pregnancy के दौरान जरूरी जांच कर उनका रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
- High-Risk Pregnancy वाली महिलाओं की निगरानी के लिए अलग मेडिकल टीम बनाई जाएगी।
- अस्पतालों में Life-Saving Medicines, पर्याप्त Blood, साफ Operation Theatre, संक्रमण मुक्त वातावरण और Aseptic ICU सुनिश्चित किए जाएंगे।
- प्रत्येक गर्भवती महिला का Pregnancy के पहले 12 सप्ताह के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा और सभी जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
- Anemia, High Blood Pressure, Diabetes और पहले प्रसव में अधिक रक्तस्राव जैसी स्थितियों का अलग रिकॉर्ड रखा जाएगा।
Oxytocin Injection और Bupivacaine पर रोक
सरकार ने Cesarean Delivery के दौरान इस्तेमाल होने वाले Oxytocin Injection और Bupivacaine Anesthesia पर भी रोक लगा दी है। जांच के दौरान Kota में सामने आया था कि Oxytocin Injection की कुछ शीशियों में दवा की जगह पानी भरा हुआ था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
किस जिले में कितनी मौतें?
अब तक सामने आए मामलों के अनुसार:
- Kota: 5 प्रसूताओं की मौत, 7 महिलाओं की Kidney खराब।
- Bikaner: 4 प्रसूताओं की मौत, 4 महिलाओं की Kidney खराब।
- Bhilwara: जुलाई में 5 प्रसूताओं की मौत।
- Banswara: 4 प्रसूताओं की मौत।
- Jodhpur: 2 प्रसूताओं की मौत।
Medical Minister ने क्या कहा?
Medical Minister Gajendra Singh Khimsar ने कहा कि प्रसूताओं की मौत के पीछे अलग-अलग कारण सामने आए हैं। शुरुआती जांच के अनुसार कुछ मामलों में Kidney Failure, Anemia, प्रसव के बाद अत्यधिक Bleeding, Malnutrition और अन्य चिकित्सकीय जटिलताएं जिम्मेदार रही हैं। उन्होंने बताया कि Bikaner में हाल ही में हुई एक प्रसूता की मौत Cardiac Arrest के कारण हुई।

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