नई दिल्ली। Securities and Exchange Board of India (SEBI) छोटे और मझोले कारोबारों के लिए SME Listing Framework को और आसान बनाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों में कंपनियों के लिए Post-Issue Paid-up Capital की सीमा बढ़ाना, निवेशकों के लिए न्यूनतम आवेदन राशि कम करना और Market Making व Underwriting से जुड़े नियमों में राहत देना शामिल है।
₹25 करोड़ से ₹100 करोड़ हो सकती है Capital Limit
SEBI SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने वाली कंपनियों के लिए मौजूदा Post-Issue Paid-up Capital की अधिकतम सीमा ₹25 करोड़ से बढ़ाकर ₹100 करोड़ करने पर विचार कर रहा है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो करीब ₹5,000 करोड़ तक की Market Value वाली कंपनियां भी SME IPO Route का इस्तेमाल कर सकेंगी।
फिलहाल SME प्लेटफॉर्म पर अपेक्षाकृत कम वैल्यू वाली कंपनियों को ही इस रूट से लिस्टिंग का मौका मिलता है। नई व्यवस्था से ज्यादा कंपनियों के लिए SME प्लेटफॉर्म तक पहुंच आसान हो सकती है।
₹2 लाख की Minimum Investment Limit पर भी फैसला संभव
SEBI व्यक्तिगत निवेशकों के लिए SME IPO में ₹2 लाख Minimum Application Size की शर्त को कम या खत्म करने पर भी विचार कर रहा है। इस सीमा को कुछ समय पहले ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख किया गया था, जिसका उद्देश्य SME IPO में बढ़ती Speculative Retail Participation पर नियंत्रण रखना था।
अब रेगुलेटर को लगता है कि रिटेल निवेशकों के व्यवहार में सुधार और SME कंपनियों की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ इस Entry Barrier को कम किया जा सकता है।
Market Making के नियमों में मिल सकती है राहत
SME कंपनियों के शेयरों में पर्याप्त Liquidity बनाए रखने के लिए फिलहाल लिस्टिंग के बाद कम से कम तीन साल तक एक तय Market Maker की जरूरत होती है। SEBI इस अवधि और इससे जुड़े नियमों में भी बदलाव पर विचार कर रहा है।
इससे SME कंपनियों और उनसे जुड़े मार्केट पार्टिसिपेंट्स पर अनुपालन का बोझ कम हो सकता है।
Underwriting Rules भी हो सकते हैं आसान
रेगुलेटर SME IPO के पूरे इश्यू साइज की अनिवार्य Underwriting की शर्त में भी राहत देने पर विचार कर रहा है। इसमें Merchant Bankers की ओर से ‘Skin in the Game’ यानी खुद की पूंजी लगाने से जुड़ी आवश्यकताओं में बदलाव संभव है।
कंपनियों को मिलेगा Growth का बेहतर मौका
प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य उन कंपनियों को SME प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराना है जो मौजूदा मानकों के हिसाब से बहुत छोटी नहीं हैं, लेकिन Mainboard Listing की ज्यादा लागत और जटिलताओं को पूरा करना उनके लिए मुश्किल है।
अगर नए नियम लागू होते हैं, तो ऐसी कंपनियां SME प्लेटफॉर्म के जरिए पूंजी जुटाकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकती हैं और भविष्य में Mainboard पर जाने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
SME IPO Market में दिख रही तेजी
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में करीब 267 SMEs की लिस्टिंग हुई थी, जबकि 2026 की पहली छमाही में लगभग 80 SME लिस्ट हुए। इंडस्ट्री से मिले फीडबैक के बाद SEBI द्वारा नियमों की समीक्षा की जा रही है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर SME IPO Market में कंपनियों और निवेशकों, दोनों की भागीदारी बढ़ सकती है।


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