राज ठाकरे का फडणवीस पर हमला, बोले- मुख्यमंत्री को ‘देख लूंगा’ जैसी भाषा शोभा नहीं देती

मुंबई: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की ‘मिसिंग लिंक’ सुरंग में पानी के रिसाव के मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री के ‘देख लूंगा’ वाले बयान की आलोचना करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

एमएनएस रेलवे कामगार सेना की वर्षगांठ के कार्यक्रम में राज ठाकरे ने कहा कि महायुति सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए भावनात्मक मुद्दों का सहारा ले रही है। उन्होंने विधानसभा में मुख्यमंत्री की उस टिप्पणी पर भी सवाल उठाया, जिसमें विपक्ष को इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करने की सलाह दी गई थी।

विपक्ष पर राजनीति का आरोप लगाने पर साधा निशाना

राज ठाकरे ने कहा कि जब विपक्ष सरकार से सवाल पूछता है तो उसे राजनीति करार दिया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने भी विभिन्न मुद्दों पर आंदोलन किए थे, तो क्या वह राजनीति नहीं थी। उनके मुताबिक, मिसिंग लिंक परियोजना में खामियों पर सवाल उठाना महाराष्ट्र का अपमान नहीं है।

‘देख लूंगा’ बयान पर जताई आपत्ति

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ‘देख लूंगा’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राज ठाकरे ने कहा कि मुख्यमंत्री के पद की गरिमा के अनुरूप ऐसी भाषा नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह कहना चाहिए था कि सरकार मामले में हस्तक्षेप करेगी और समस्या का समाधान सुनिश्चित करेगी। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यह बयान महाराष्ट्र के विधायकों के लिए था या दिल्ली के नेताओं को संदेश देने के लिए।

मुंबई-पुणे विकास मॉडल पर उठाए सवाल

मनसे प्रमुख ने आरोप लगाया कि मुंबई और पुणे का विकास अव्यवस्थित हो गया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में उद्घाटन की गई सुरंग में कुछ ही दिनों बाद पानी का रिसाव और निर्माण संबंधी खामियां सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। उनके अनुसार, भ्रष्टाचार के कारण घटिया निर्माण हो रहा है और जनता को अधूरी परियोजनाएं तथा खराब सड़कें मिल रही हैं।

उन्होंने कहा कि 1800 के दशक में बने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसटी) और पुराने पुल आज भी मजबूत हैं, जबकि नए निर्माण कुछ ही समय में खराब हो रहे हैं।

रेलवे भर्ती आंदोलन का किया जिक्र

राज ठाकरे ने वर्ष 2008 के रेलवे भर्ती आंदोलन को याद करते हुए कहा कि उसी आंदोलन ने मनसे को नई पहचान दिलाई थी। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के बाद रेलवे भर्ती परीक्षाओं में स्थानीय भाषा को महत्व मिला और बड़ी संख्या में मराठी युवाओं को रोजगार के अवसर मिले।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से रेलवे भर्ती, प्लेटफॉर्म स्टॉल आवंटन और रेलवे में स्थानीय युवाओं की भागीदारी पर नजर बनाए रखने की अपील भी की।

राम मंदिर ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल

राज ठाकरे ने राम मंदिर ट्रस्ट में कथित चढ़ावे की चोरी के मुद्दे पर भी भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यदि दान की राशि में अनियमितता हुई है तो इस पर चर्चा होना जरूरी है। उन्होंने सवाल किया कि भ्रष्टाचार की बात उठाना धर्म का अपमान कैसे हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को सबसे पहले भाजपा के ही एक सांसद ने उठाया था और ट्रस्ट के अधिकांश सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की गई है।

 

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