New Delhi: ठगी के मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर को दिल्ली की एक अदालत ने Impersonation Case में आठ साल की जेल की सजा सुनाई है। मामला 2017 का है, जब सुकेश ने खुद को सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा जज बताकर एक भ्रष्टाचार मामले में विशेष न्यायाधीश को जमानत के लिए प्रभावित करने की कोशिश की थी।
शनिवार को Chief Judicial Magistrate Harshita Mishra ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि सजा ऐसी होनी चाहिए, जिससे इस तरह के अपराध करने वालों के बीच Deterrent Message जाए।
तीन अलग-अलग धाराओं में सुनाई गई सजा
अदालत ने सुकेश को IPC Section 170 के तहत सरकारी कर्मचारी के रूप में खुद को पेश करने के अपराध में दो साल की सजा सुनाई। वहीं, IPC Section 187 के तहत लोक सेवक को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने के मामले में भी दो साल की जेल की सजा दी गई।
इसके अलावा IPC Section 507 के तहत Criminal Intimidation के अपराध में चार साल की सजा सुनाई गई। इस तरह तीनों अपराधों के लिए अदालत ने कुल आठ साल के कारावास का आदेश दिया।
‘Calculated Criminality के गंभीर परिणाम होने चाहिए’
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश जैसे गंभीर अपराधों के लिए सजा भी अपराध की गंभीरता के अनुरूप होनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी सजा का उद्देश्य यह स्पष्ट संदेश देना है कि Administration of Justice के खिलाफ जानबूझकर किए गए अपराधों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
Custody में बिताया समय सजा में होगा शामिल
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि सुकेश चंद्रशेखर को पहले से Custody में बिताई गई अवधि का लाभ मिलेगा। यानी हिरासत में पहले बिताया गया समय उसकी सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा।
यह मामला वर्ष 2017 का है, जब सुकेश पर खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा जज के तौर पर पेश कर एक विशेष न्यायाधीश को भ्रष्टाचार के एक मामले में जमानत देने के लिए प्रभावित करने का आरोप लगा था।


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