हरिद्वार। उत्तराखंड सम्मिलित राज्य कनिष्ठ अभियंता (जेई) भर्ती परीक्षा के संशोधित परिणाम जारी होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। दिव्यांग वर्ग के कई अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि संशोधित परिणाम में मेरिट और आरक्षण नियमों की अनदेखी की गई है।
माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल के निर्देशों के बाद लगभग दो वर्षों की लंबी प्रक्रिया के पश्चात 5 जून 2026 को भर्ती परीक्षा का संशोधित परिणाम घोषित किया गया था। हालांकि परिणाम जारी होने के कुछ दिनों बाद ही दिव्यांग अभ्यर्थियों ने चयन सूची को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों के बाहर होने पर विवाद
दिव्यांग अभ्यर्थियों का आरोप है कि OA (ऑर्थोपेडिकली अफेक्टेड) श्रेणी में 400 अंक प्राप्त करने वाले एक अभ्यर्थी का चयन कर उन्हें उत्तराखंड जल संस्थान में नियुक्ति के लिए चयनित किया गया है, जबकि इसी श्रेणी में अधिक अंक प्राप्त करने वाले कई अभ्यर्थियों को चयन सूची में स्थान नहीं मिला।
अभ्यर्थियों के अनुसार 450 अंक हासिल करने वाले आशीष चौहान सहित सात अन्य उम्मीदवार चयन से वंचित रह गए हैं। इसे लेकर अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
आयोग के स्पष्टीकरण पर भी उठे प्रश्न
अभ्यर्थियों का कहना है कि जब उन्होंने इस संबंध में आयोग से जानकारी मांगी तो उन्हें बताया गया कि चयनित उम्मीदवार अनुसूचित जाति (एससी) और OA श्रेणी से संबंधित है, इसलिए उसका चयन किया गया है।
हालांकि, विरोध जता रहे अभ्यर्थियों का तर्क है कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत दिव्यांग श्रेणी एक विशेष आरक्षण श्रेणी है और दिव्यांग पदों के चयन में सामान्य आरक्षण वर्गों की व्याख्या अलग तरीके से की जानी चाहिए।
दिव्यांग अभ्यर्थियों ने उठाए कानूनी सवाल
अभ्यर्थियों का दावा है कि भर्ती विज्ञापन और पूर्व में घोषित चयन परिणामों में दिव्यांग उम्मीदवारों को अलग-अलग सामाजिक आरक्षण श्रेणियों के आधार पर वर्गीकृत नहीं किया गया था। उनका कहना है कि संशोधित परिणाम में अपनाई गई प्रक्रिया अधिनियम की भावना और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रतीत नहीं होती।
उन्होंने मांग की है कि आयोग चयन प्रक्रिया और आरक्षण रोस्टर को सार्वजनिक करते हुए स्थिति स्पष्ट करे, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी
दिव्यांग अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं किया गया और परिणाम की समीक्षा नहीं हुई तो वे एक बार फिर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग को लेकर नैनीताल उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।
फिलहाल इस पूरे मामले पर आयोग की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अभ्यर्थियों की शिकायतों और चयन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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