Pavitra Rishta की अभिनेत्री Usha Nadkarni का दर्द: 80 की उम्र में अकेली जिंदगी, बेटे की बात ने किया भावुक

Pavitra Rishta से घर-घर में पहचान बनाने वाली वरिष्ठ अभिनेत्री Usha Nadkarni ने अपनी निजी जिंदगी के कई दर्दनाक अनुभव साझा किए हैं। लगभग 70 वर्षों से Hindi और Marathi Entertainment Industry में सक्रिय Usha Nadkarni आज 80 वर्ष की उम्र में Mumbai में अकेले रहती हैं।

1987 से अकेले रह रही हैं Usha Nadkarni

हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में Usha Nadkarni ने बताया कि वह 1987 से अकेले रह रही हैं। उनका बेटा विदेश में रहता है और उनके सभी भाई-बहनों का निधन हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें अकेले रहने की आदत हो गई है और उन्हें किसी तरह का डर नहीं लगता।

उन्होंने यह भी कहा कि अकेले रहने की वजह से कभी-कभी मौत का ख्याल आता है, लेकिन उन्हें मृत्यु का भय नहीं है।

बेटे की बात ने किया भावुक

Usha Nadkarni ने बताया कि काम में व्यस्त रहने के कारण उनके बेटे की परवरिश उनकी मां ने की। उन्होंने स्वीकार किया कि थिएटर और अभिनय की व्यस्तता के चलते वह बेटे को पर्याप्त समय नहीं दे सकीं।

उन्होंने भावुक होकर बताया कि उनका बेटा आज भी उनसे कहता है, “आपने सिर्फ मुझे जन्म दिया है, मेरी असली मां मेरी नानी थीं।”

हिंसक पिता के साये में बीता बचपन

अभिनेत्री ने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि उनके पिता Indian Air Force में थे और बेहद गुस्सैल स्वभाव के थे। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटी-छोटी बातों पर भी उनके पिता हिंसक हो जाते थे।

एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपने भाई को पिटाई से बचाने की कोशिश की, तो उनके पिता ने Koita (धारदार हथियार) से उन पर हमला कर दिया, जिससे उनके हाथ में चोट आई। इसके बावजूद उन्होंने अगले दिन अपना नाटक किया।

परिवार के विरोध के बावजूद चुना अभिनय

Usha Nadkarni ने बताया कि बचपन से उनका सपना अभिनेत्री बनने का था, लेकिन उनकी मां इस फैसले के खिलाफ थीं। एक समय ऐसा भी आया जब उनकी मां ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। कुछ दिन दोस्त के घर रहने के बाद वह वापस घर लौटीं और अपने अभिनय के सपने को पूरा करने में जुट गईं।

आज Usha Nadkarni को Marathi Cinema, Hindi Television, Theatre और Films की सबसे सम्मानित अभिनेत्रियों में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन में कई बार आर्थिक मजबूरियों के कारण उन्हें ऐसे प्रोजेक्ट भी करने पड़े, जिनमें उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।

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