NEET-UG Paper Leak के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शन में शामिल छात्रों को Supreme Court से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने Article 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली समेत पांच राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIRs रद्द करने का आदेश दिया है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को Compensation देने को लेकर केंद्र सरकार ने भी भरोसा दिलाया है।
हालांकि, मामले में एक अहम पेंच अभी बाकी है। कोर्ट ने ऐसे 2873 लोगों के खिलाफ Fresh FIR दर्ज करने की अनुमति दी है, जिनके बारे में सरकार ने आपराधिक रिकॉर्ड होने की बात कही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब प्रदर्शन से जुड़े मामलों में राहत दी गई है, तो इन लोगों पर दोबारा कार्रवाई क्यों होगी?
किन राज्यों में रद्द होंगी FIR?
Supreme Court के आदेश के बाद Delhi, Assam, Maharashtra, West Bengal और Bihar में NEET प्रदर्शन से संबंधित FIRs खत्म होंगी।
ये मामले 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े बताए गए हैं। दिल्ली पुलिस और संबंधित चार राज्य सरकारों ने Article 142 के तहत इन मामलों को खत्म करने की मांग की थी।
इस मामले की सुनवाई Chief Justice Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana की पीठ ने की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIRs रद्द करने का निर्देश दिया।
प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वालों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा
सुनवाई के दौरान Solicitor General Tushar Mehta ने केंद्र सरकार की ओर से कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत के दौरान दिए गए आश्वासन पर सरकार कायम है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि NEET Protest के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को Compensation दिया जाएगा। केंद्र ने इस प्रक्रिया के लिए करीब तीन महीने का समय मांगा है।
मुआवजे की व्यवस्था और प्रक्रिया तय करने के लिए केंद्र संबंधित State Governments और अन्य पक्षों के साथ बातचीत करेगा।
2873 लोगों पर Fresh FIR क्यों?
Supreme Court ने जहां प्रदर्शन से जुड़ी FIRs खत्म करने का आदेश दिया, वहीं सरकार को 2873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति भी दी है।
सरकार का कहना है कि इन लोगों के खिलाफ पहले से Criminal Record मौजूद है। इसी आधार पर इनके खिलाफ अलग से कार्रवाई की जाएगी।
सुनवाई के दौरान वकील हरिहरन ने इन 2873 लोगों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि यह साफ हो सके कि किन व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई प्रस्तावित है।
CJP ने 5 सितंबर का March क्यों वापस लिया?
CJP की ओर से पांच सितंबर को प्रस्तावित March को भी वापस लेने का फैसला किया गया है। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने कोर्ट को बताया कि केंद्र के सकारात्मक रुख और Supreme Court के आदेश को देखते हुए मार्च वापस लेने का निर्णय लिया गया।
कोर्ट ने सौरव दास के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया।
Supreme Court ने बातचीत पर दिया जोर
सुनवाई के दौरान Chief Justice Surya Kant ने कहा कि अगर दोनों पक्ष Mutual Trust के साथ खुले मन से बातचीत करें तो मुश्किल से मुश्किल समस्याओं का समाधान भी निकाला जा सकता है।
इस पर केंद्र की ओर से Tushar Mehta ने कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत Positive और Constructive रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं।
इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से रखी गई बातों को अपने आदेश में दर्ज किया और दिल्ली समेत पांच राज्यों में NEET प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIRs को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।
क्या है पूरे मामले का मतलब?
Supreme Court के फैसले से एक तरफ NEET प्रदर्शन में शामिल छात्रों को बड़ी राहत मिली है, वहीं 2873 लोगों पर Fresh FIR की अनुमति दिए जाने से मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब इन लोगों की सूची और उनके कथित Criminal Background को लेकर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। दूसरी ओर, केंद्र की ओर से Compensation के आश्वासन पर भी अगले तीन महीनों में होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।


Leave a Reply