परिसीमन पर DMK और TVK को BJP ने घेरा, नारायणन तिरुपति बोले- दोनों एक ही नाव पर सवार

Tamil Nadu Delimitation Row: तमिलनाडु में Delimitation के मुद्दे पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। तमिलनाडु विधानसभा में लोकसभा सीटों की संख्या और राज्यों के बीच मौजूदा सीट बंटवारे को लेकर प्रस्ताव पारित होने के बाद BJP ने DMK और TVK पर निशाना साधा है।

तमिलनाडु बीजेपी के प्रवक्ता Narayanan Thirupathy ने दोनों दलों को इस मुद्दे पर “एक ही नाव पर सवार” बताया। उन्होंने कहा कि परिसीमन को North-South Conflict के तौर पर पेश करना सही नहीं है और देश को क्षेत्रीय आधार पर बांटने की राजनीति से बचना चाहिए।

विधानसभा में क्या प्रस्ताव पास हुआ?

तमिलनाडु विधानसभा ने मुख्यमंत्री M.K. Stalin द्वारा पेश किए गए विशेष प्रस्ताव का समर्थन किया। प्रस्ताव में केंद्र से आग्रह किया गया कि भविष्य में होने वाले परिसीमन के बावजूद Lok Sabha Seats की कुल संख्या 543 पर स्थायी रूप से बरकरार रखी जाए।

इसके साथ ही राज्यों के बीच मौजूदा Parliamentary Seat Allocation को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई है। राज्य सरकार का तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण जैसे मामलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को परिसीमन के बाद राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान नहीं होना चाहिए।

BJP बोली- DMK पूरी तरह उलझन में

नारायणन तिरुपति ने कहा कि बीजेपी लंबे समय से यह सवाल उठा रही है कि DMK और TVK परिसीमन को लेकर अलग-अलग बातें कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि पहले DMK की मांग थी कि तमिलनाडु की एक भी लोकसभा सीट कम नहीं होनी चाहिए, जबकि अब सीटों की संख्या बढ़ने की संभावनाओं को लेकर अलग तरह की दलील दी जा रही है।

उन्होंने देश के शीर्ष संवैधानिक पदों का उदाहरण देते हुए कहा कि President Droupadi Murmu ओडिशा से, Vice President C.P. Radhakrishnan तमिलनाडु से और Prime Minister Narendra Modi गुजरात से हैं। उनके मुताबिक, ऐसे में परिसीमन को उत्तर और दक्षिण के बीच टकराव के रूप में देखना उचित नहीं है।

North-South Conflict’ की राजनीति से बचने की अपील

बीजेपी विधायक Bhojarajan ने विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अधिक जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए Delimitation जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद भारत एक देश है। इसलिए परिसीमन को उत्तर-दक्षिण संघर्ष से जोड़कर पेश नहीं किया जाना चाहिए।

बीजेपी का तर्क है कि परिसीमन के जरिए बदलती जनसंख्या के अनुरूप Political Representation को व्यवस्थित किया जा सकता है।

DMK ने बताया परिसीमन को ‘अनुचित’

दूसरी ओर, DMK ने परिसीमन की मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। पार्टी प्रवक्ता TKS Elangovan ने कहा कि DMK परिसीमन के खिलाफ रही है क्योंकि इससे दक्षिणी राज्यों को राजनीतिक नुकसान होने की आशंका है।

उन्होंने दावा किया कि अगर मौजूदा जनसंख्या के आधार पर सीटों का बड़े पैमाने पर पुनर्वितरण किया गया तो दक्षिणी राज्यों की तुलना में उत्तरी राज्यों का प्रतिनिधित्व काफी बढ़ सकता है।

इलांगोवन के मुताबिक, DMK चाहती है कि परिसीमन के बाद भी मौजूदा Constituency Structure और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन सुरक्षित रहे।

दक्षिणी राज्यों को नुकसान की आशंका का दावा

DMK नेता ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन से Southern States को नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत के राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है और अब उसी वजह से उनके संसदीय प्रतिनिधित्व में कटौती नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, दक्षिणी राज्यों को परिसीमन के जरिए नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

तमिलनाडु में इस मुद्दे पर BJP, DMK और TVK के बीच बढ़ती बयानबाजी से साफ है कि आगामी चुनावी राजनीति में Delimitation एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

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