बेंगलुरु: कर्नाटक में चल रहे SIR (Special Intensive Revision) के तहत Draft Electoral Roll जारी होने से पहले ही कई Voters को Enumeration Form ऑनलाइन जमा करने के बाद “Logical Discrepancies” और “Anomalies” के नोटिफिकेशन मिलने लगे हैं। इससे संकेत मिलता है कि सत्यापन प्रक्रिया में तकनीकी जांच पहले ही शुरू हो चुकी है।
Form Submit करते ही दिख रहे Anomaly Alerts
कई मतदाताओं ने बताया कि Enumeration Form जमा करने के बाद पोर्टल पर Pop-up Notification दिखाई देता है, जिसमें बताया जाता है कि उनके डेटा में Anomaly पाई गई है। साथ ही, उस Logical Discrepancy को देखने का विकल्प भी दिया जाता है।
एक मतदाता ने बताया कि उन्होंने अपने पिता की सही जानकारी दर्ज करने के बावजूद सिस्टम ने यह कहते हुए Anomaly दिखाई कि वर्तमान Electoral Roll और पिछले SIR के रिकॉर्ड में पिता के नाम का मिलान नहीं हो रहा है।
एक अन्य मामले में सिस्टम ने यह संदेश दिया कि माता-पिता और मतदाता की उम्र में 15 साल से कम का अंतर दिख रहा है, जिससे गलत मिलान होने की आशंका जताई गई।
वहीं, कुछ लोगों को यह भी नोटिफिकेशन मिला कि जिस व्यक्ति को उन्होंने अपने पिता के रूप में दर्ज किया है, उसे छह अन्य लोगों ने भी पिता के रूप में दर्ज किया है, जिससे रिकॉर्ड पर संदेह पैदा हो रहा है।
सही जानकारी देने के बाद भी आ रही परेशानी
मतदाताओं का कहना है कि उन्होंने सभी जानकारी सही दर्ज की, लेकिन इसके बावजूद पोर्टल लगातार Anomalies दिखा रहा है। इससे लोगों में भ्रम और चिंता बढ़ गई है।
क्या इस्तेमाल हो रहा है AI-based System?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कर्नाटक में AI-based System के जरिए Logical Discrepancies की पहचान की जा रही है या नहीं। हालांकि, इससे पहले West Bengal में भी SIR के दौरान AI-based System के कारण कई वास्तविक मतदाताओं को गलत तरीके से False Positives के तहत Anomalous घोषित किए जाने पर विवाद हुआ था।
CEO ने क्या कहा?
कर्नाटक के Chief Electoral Officer (CEO) V. Anbu Kumar ने हाल ही में कहा था कि जिन मतदाताओं का नाम 2002 Electoral Roll में नहीं है, वे भी Enumeration Form भरें। उनका नाम Draft Electoral Roll में शामिल रहेगा।
इसके बाद ऐसे मतदाताओं को Electoral Registration Officer (ERO) की ओर से नोटिस मिलेगा और वे Election Commission द्वारा निर्धारित 12 Documents में से कोई एक दस्तावेज़ जमा कर सकेंगे। दस्तावेज़ों की जांच के बाद ERO अंतिम निर्णय लेगा।
मतदाताओं ने उठाए सवाल
मतदाताओं का कहना है कि जब उन्होंने सही जानकारी दी है, तो उन्हें अतिरिक्त जांच और ERO Proceedings का सामना क्यों करना पड़े? उनका यह भी सवाल है कि यदि रिकॉर्ड में पहले से ही गड़बड़ी थी, तो Mapping Exercise के दौरान उसकी पहचान क्यों नहीं की गई।
गौरतलब है कि कर्नाटक में Mapping Exercise का काम 92% से अधिक पूरा हो चुका है।
जब इस मामले पर CEO से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस नए घटनाक्रम की जानकारी नहीं है और वे इसकी जांच करेंगे।

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