New Delhi: 8th Pay Commission को लेकर देश के एक करोड़ से अधिक Central Employees और Pensioners की उम्मीदें बढ़ गई हैं। कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने House Rent Allowance (HRA) में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो खासकर Delhi, Mumbai जैसे बड़े शहरों में कार्यरत कर्मचारियों की मासिक आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
Lucknow Meeting में उठा HRA Revision का मुद्दा
हाल ही में 8th Pay Commission ने Lucknow में विभिन्न कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान HRA Revision सबसे अहम मुद्दों में शामिल रहा। कई संगठनों ने सुझाव दिया कि बढ़ती महंगाई और किराए को देखते हुए X Category Cities में HRA की दर को 40% तक किया जाए।
बड़े शहरों में बढ़ा Rental Cost, कर्मचारियों पर बढ़ा बोझ
All India NPS Employees Federation के राष्ट्रीय अध्यक्ष Manjeet Singh Patel का कहना है कि Delhi और Mumbai जैसे महानगरों में मकानों का किराया पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है।
उनके अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में Level-1 Employee को लगभग ₹5,400 का HRA मिलता है, जबकि एक सामान्य 2BHK Flat का मासिक किराया ₹12,000 या उससे अधिक है। ऐसे में कर्मचारियों के लिए आवास का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों ने रखा नया HRA Proposal
फेडरेशन ने आयोग के सामने शहरों की श्रेणी के अनुसार नई HRA Rates का प्रस्ताव रखा है—
- X Category Cities – 36%
- Y Category Cities – 24%
- Z Category Cities – 12%
कुछ कर्मचारी संगठनों ने X Category शहरों में HRA को 40% तक करने की भी मांग की है। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई से राहत मिल सकेगी।
अभी कितनी मिलती है HRA Rate?
वर्तमान में Central Government Employees को शहरों की श्रेणी के अनुसार 10%, 20% और 30% की दर से HRA दिया जाता है।
गौरतलब है कि 7th Pay Commission लागू होने पर यह दरें क्रमशः 8%, 16% और 24% थीं। लेकिन Dearness Allowance (DA) के 50% तक पहुंचने के बाद January 2024 में Finance Ministry ने इन्हें बढ़ाकर 10%, 20% और 30% कर दिया था।
कर्मचारियों को क्या मिलेगी राहत?
यदि 8th Pay Commission कर्मचारी संगठनों के प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो लाखों Central Employees की Take Home Salary में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, फिलहाल आयोग ने इस संबंध में कोई अंतिम फैसला या आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

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