‘परोपकाराय सतां विभूतयः’— सुभाषित के जरिए पीएम मोदी ने दी स्वामीजी के आदर्शों को नई ऊंचाई

नई दिल्ली, 01 अप्रैल । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिवकुमार स्वामीजी की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने आज एक्स पर साझा अपने संदेश में स्वामीजी को करुणा, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामीजी का संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने शिक्षा, समाज कल्याण और अध्यात्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान में अहम भूमिका निभाई। उनका जीवन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि सच्ची महानता दूसरों की सेवा में निहित होती है।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि स्वामीजी के आदर्श आज भी देशवासियों को प्रेरित कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का मार्ग दिखाते रहेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक सुभाषित भी उद्धृत किया, “पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः, स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः। नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः, परोपकाराय सतां विभूतयः॥”

इस सुभाषित का अर्थ है कि नदियां अपना जल स्वयं नहीं पीतीं, वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और बादल अपनी वर्षा का लाभ स्वयं नहीं उठाते। उसी प्रकार सज्जनों की संपत्ति और शक्ति सदैव दूसरों के उपकार के लिए होती है।

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