निठारी कांड: रिहाई के बाद बदलता रहा ठिकाना, चाय का खोखा और खाने की ठेली लगाकर गुजारा कर रहा था सुरेंद्र कोली

Nithari Case के सह आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वह जेल से बाहर आने के बाद कभी Dehradun तो कभी Haridwar में रहकर छोटे-मोटे काम कर अपनी आजीविका चला रहा था।

चर्चित Nithari Case से जुड़े सुरेंद्र कोली की मौत के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है। 53 वर्षीय सुरेंद्र कोली ने जेल से रिहाई के बाद एक जगह स्थायी रूप से रहने के बजाय अलग-अलग स्थानों पर रहकर गुजर-बसर की। कभी वह देहरादून में रहा तो कभी हरिद्वार में छोटे कारोबार के जरिए अपनी रोजी-रोटी चलाता रहा।

जानकारी के अनुसार, हरिद्वार के SIDCUL Area में वह खाने की ठेली लगाता था। इसके बाद करीब तीन दिन पहले वह Bhupatwala पहुंचा था। यहां भारत माता मंदिर से पहले उसने किराये पर एक चाय का खोखा लिया और वहीं से अपना काम शुरू किया था।

शुक्रवार सुबह इसी खोखे के अंदर उसका शव फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने पर Saptarishi Police मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर Postmortem के लिए भेज दिया है। मामले की जांच की जा रही है।

रिहाई के बाद Dehradun और Haridwar में रहा

सुरेंद्र कोली मूल रूप से उत्तराखंड के Almora District की भिकियासैंण तहसील के मंगरुखाल गांव का रहने वाला था। वर्ष 2006 के चर्चित Nithari Case में वह सह आरोपी रहा था। अदालत से बरी होने के बाद वह नवंबर 2025 में जेल से बाहर आया था।

जेल से रिहाई के बाद वह हरिद्वार पहुंचा और कुछ समय देहरादून में भी रहा। इसके बाद उसने हरिद्वार के रोशनाबाद क्षेत्र में चाय की ठेली लगाकर काम शुरू किया। करीब तीन दिन पहले उसने भूपतवाला में भारत माता मंदिर के पास एक खोखा किराये पर लिया था।

खोखे के अंदर मिला शव

शुक्रवार सुबह आसपास के लोगों ने खोखे के अंदर एक व्यक्ति को संदिग्ध अवस्था में देखा। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। Saptarishi Police Outpost के प्रभारी खेमेंद्र गंगवार टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

पुलिस ने मृतक की पहचान और सत्यापन कराया तो उसके Nithari Case से जुड़े होने की जानकारी सामने आई। कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

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