टाटा संस में उत्तराधिकार की रेस: नरेंद्रन और सौरभ सबसे आगे, आशीष चौहान हो सकते हैं ‘डार्क हॉर्स’

नई दिल्ली। टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी शुरू हो गई है। टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होने जा रहा है और उन्होंने इसके बाद दोबारा पद संभालने की इच्छा नहीं जताई है। इसके साथ ही करीब 275 अरब डॉलर से अधिक के टाटा साम्राज्य की कमान किसके हाथों में जाएगी, इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

उत्तराधिकारी का चयन ऐसे समय हो रहा है, जब टाटा समूह एयर इंडिया, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, डिजिटल कारोबार और टाटा संस की संभावित लिस्टिंग जैसे कई बड़े मोर्चों पर भारी निवेश कर रहा है। ऐसे में अगला चेयरमैन केवल समूह की विरासत को आगे बढ़ाने वाला नहीं, बल्कि अगले दशक की रणनीतिक दिशा तय करने वाला भी होगा।

तीन नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, उत्तराधिकारी की दौड़ में तीन नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। इनमें दो टाटा समूह के अंदर से हैं, जबकि एक बाहरी उम्मीदवार हैं।

  • टी.वी. नरेंद्रन — टाटा स्टील के सीईओ और एमडी
  • सौरभ अग्रवाल — टाटा संस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ग्रुप सीएफओ
  • आशीष चौहान — नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के एमडी और सीईओ

इनमें नरेंद्रन और अग्रवाल को मजबूत आंतरिक दावेदार माना जा रहा है, जबकि आशीष चौहान का नाम बाहरी ‘डार्क हॉर्स’ के तौर पर सामने आया है।

टी.वी. नरेंद्रन: टाटा की परंपरा और लंबा अनुभव

टी.वी. नरेंद्रन टाटा समूह के सबसे अनुभवी ऑपरेटिंग लीडर्स में से एक हैं। वह लंबे समय से टाटा स्टील से जुड़े हुए हैं और एक दशक से अधिक समय से कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं।

उनके कार्यकाल में टाटा स्टील को वैश्विक कमोडिटी चक्र, भारी पूंजीगत निवेश और यूरोप के चुनौतीपूर्ण कारोबार जैसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा है। नरेंद्रन को टाटा संस्कृति और समूह के कामकाज की गहरी समझ है।

वह वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन के चेयरमैन और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं।

हालांकि, उनकी चुनौती यह होगी कि स्टील जैसे बड़े लेकिन अपेक्षाकृत केंद्रित कारोबार को चलाने के अनुभव को आईटी, एयरलाइन, रिटेल, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे बेहद विविध कारोबार वाले समूह के स्तर पर कैसे इस्तेमाल किया जाए।

सौरभ अग्रवाल: पूंजी और निवेश के विशेषज्ञ

अगर टाटा संस को ऐसा चेयरमैन चाहिए जो पूंजी आवंटन, निवेश और रणनीतिक सौदों में विशेषज्ञता रखता हो, तो सौरभ अग्रवाल का प्रोफाइल बेहद मजबूत दिखाई देता है।

अग्रवाल 2017 में एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा संस से जुड़े थे। वर्तमान में वह एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ग्रुप सीएफओ हैं।

निवेश बैंकिंग और कॉरपोरेट फाइनेंस में लंबा अनुभव रखने वाले अग्रवाल टाटा समूह में पूंजी आवंटन, निवेश और पोर्टफोलियो से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में भूमिका निभाते हैं।

टाटा समूह इस समय जिस बड़े निवेश चक्र से गुजर रहा है, उसमें यह अनुभव उनके पक्ष में जा सकता है। एयर इंडिया के विस्तार से लेकर सेमीकंडक्टर और ईवी कारोबार तक, समूह को आने वाले वर्षों में बड़ी मात्रा में पूंजी तैनात करनी होगी।

ऐसे में सवाल यह है कि क्या टाटा संस वित्तीय और निवेश विशेषज्ञता को नेतृत्व की सर्वोच्च प्राथमिकता मानेगी?

आशीष चौहान: सबसे बड़ा ‘डार्क हॉर्स’?

इस पूरी रेस में सबसे दिलचस्प नाम आशीष चौहान का है। एनएसई के एमडी और सीईओ चौहान का करियर तकनीक, वित्तीय बाजार, संस्थागत निर्माण और नियामकीय मामलों से जुड़ा रहा है।

आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई और आईआईएम कलकत्ता से प्रबंधन शिक्षा हासिल करने वाले चौहान ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईडीबीआई बैंक में भी काम किया है। वह एनएसई के शुरुआती दौर से जुड़े रहे और बाद में बीएसई के एमडी एवं सीईओ भी बने।

उनकी सबसे बड़ी ताकत बड़े संस्थानों को बदलने और कठिन परिस्थितियों से निकालने का अनुभव माना जाता है। तकनीकी बदलाव और नियामकीय वातावरण की समझ भी उनके पक्ष में जाती है।

लेकिन टाटा संस की चुनौती बिल्कुल अलग स्तर की है। यहां चेयरमैन को वित्तीय बाजार के साथ-साथ एयरलाइन, आईटी, ऑटोमोबाइल, स्टील, पावर, रिटेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल जैसे विविध क्षेत्रों की रणनीति पर नजर रखनी होगी।

यही वजह है कि अगर चौहान को चुना जाता है तो यह टाटा समूह की परंपरागत उत्तराधिकार प्रक्रिया से हटकर एक बड़ा रणनीतिक फैसला माना जाएगा।

अगले चेयरमैन के सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां

नए चेयरमैन के सामने कई महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे।

एयर इंडिया का पुनर्निर्माण: एयर इंडिया को वैश्विक स्तर की एयरलाइन बनाने के लिए विमान खरीद, परिचालन सुधार और बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी।

सेमीकंडक्टर और ईवी: टाटा समूह सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में बड़े निवेश कर रहा है। इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण होगा।

डिजिटल कारोबार: टाटा डिजिटल के विभिन्न कारोबारों को मजबूत करना और मुनाफे की दिशा में ले जाना भी बड़ी चुनौती होगी।

टीसीएस का भविष्य: समूह की सबसे बड़ी आईटी कंपनी को एआई और तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त बनाए रखनी होगी।

टाटा संस की संभावित लिस्टिंग: टाटा संस की संभावित आईपीओ प्रक्रिया और उससे जुड़े कॉरपोरेट गवर्नेंस के सवाल भी नए नेतृत्व के एजेंडे में महत्वपूर्ण रहेंगे।

नोएल टाटा की भूमिका क्यों अहम?

रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बने। टाटा संस पर टाटा ट्रस्ट्स का महत्वपूर्ण प्रभाव होने के कारण उत्तराधिकारी के चयन में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

नए चेयरमैन को केवल कारोबारी प्रदर्शन पर ही ध्यान नहीं देना होगा, बल्कि टाटा समूह की लंबे समय से चली आ रही संस्थागत संस्कृति और परोपकारी विरासत के साथ भी संतुलन बनाना होगा।

किसके पक्ष में जा सकता है फैसला?

फिलहाल किसी नाम को अंतिम माना जाना जल्दबाजी होगी। टी.वी. नरेंद्रन समूह के भीतर से आने वाले अनुभवी ऑपरेटर हैं और टाटा संस्कृति की मजबूत समझ रखते हैं। सौरभ अग्रवाल के पक्ष में उनकी वित्तीय विशेषज्ञता और पूंजी आवंटन का अनुभव जाता है।

वहीं आशीष चौहान का प्रोफाइल सबसे अलग है। तकनीक, वित्तीय बाजार, नियामकीय मामलों और संस्थागत निर्माण का उनका अनुभव उन्हें संभावित ‘डार्क हॉर्स’ बनाता है।

अंततः टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस का बोर्ड किस गुण को सबसे अधिक महत्व देता है—परंपरा, ऑपरेशनल अनुभव, पूंजी आवंटन या नए दौर की तकनीकी और नियामकीय समझ—इसी पर उत्तराधिकार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

जो भी नाम सामने आएगा, उसके सामने सिर्फ टाटा समूह को चलाने की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि अगले दशक में दुनिया के सबसे बड़े और विविध कारोबारी समूहों में से एक की दिशा तय करने की चुनौती भी होगी।

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