Nitish Kumar Security Head: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पूर्व Security Head रहे हरेंद्र बहादुर सिंह की आखिरकार Political Entry हो गई है। बिहार सरकार ने उन्हें राज्य नागरिक परिषद (State Citizens Council) का महासचिव नियुक्त किया है। यह पद उन्हें JDU quota के तहत मिला है। माना जा रहा है कि लंबे समय से राजनीति में उनके प्रवेश को लेकर चल रही चर्चाओं पर अब विराम लग गया है।
हरेंद्र सिंह को मिला अहम पद
हरेंद्र बहादुर सिंह मूल रूप से Bhojpur जिले के रहने वाले हैं। वह लंबे समय तक नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा कई मौकों पर उन्हें Nishant Kumar के साथ भी देखा गया है।
बिहार सरकार के Cabinet Secretariat की ओर से हाल ही में विभिन्न समितियों और परिषदों में पदों पर नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना जारी की गई। इसी सूची में हरेंद्र बहादुर सिंह को State Citizens Council का महासचिव बनाए जाने की जानकारी सामने आई।
इस पद पर पहले JDU के छोटू सिंह जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पार्टी से निष्कासन के बाद अब उनकी जगह हरेंद्र सिंह को नियुक्त किया गया है।
अजय सिंह समेत कई नेताओं को जिम्मेदारी
सरकार की ओर से जारी नियुक्तियों की सूची में सिवान की पूर्व सांसद कविता सिंह के पति Ajay Singh को भी राज्य नागरिक परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है। अजय सिंह को बिहार की राजनीति में प्रभावशाली और दबंग छवि वाले नेताओं में गिना जाता है।
इसके अलावा Chirag Paswan की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Surendra Vivek को भी सरकार की ओर से जिम्मेदारी दी गई है।
NDA के सहयोगी दलों के नेताओं को भी पद
नई नियुक्तियों में Upendra Kushwaha की पार्टी Rashtriya Lok Morcha के विधायक आलोक सिंह और Jitan Ram Manjhi की पार्टी से जुड़े पूर्व विधायक अनिल सिंह को भी जगह मिली है। दोनों को 20-Point Programme से संबंधित जिम्मेदारी दी गई है।
इन नियुक्तियों के साथ सरकार ने कई नेताओं को Minister of State rank का दर्जा भी दिया है।
क्या है सरकार की रणनीति?
बिहार सरकार की इन नियुक्तियों को Political Adjustment के तौर पर देखा जा रहा है। सत्ता पक्ष में ऐसे कई नेता हैं जो मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे थे या किसी वजह से खुद को राजनीतिक रूप से उपेक्षित महसूस कर रहे थे। समितियों और परिषदों में जिम्मेदारी देकर सरकार ने उन्हें महत्वपूर्ण पद और Political Recognition देने की कोशिश की है।
खास तौर पर NDA alliance के लिए अपने पद छोड़ने वाले नेताओं को भी इस प्रक्रिया में जगह मिली है। बीजेपी के पूर्व MLC देवेश कुमार इसका एक उदाहरण हैं।
राजनीतिक जानकारों की नजर में सरकार का यह कदम सत्ता पक्ष के भीतर संभावित Dissent को कम करने और अलग-अलग सहयोगी दलों के नेताओं को साथ बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।


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