लोकसभा सत्रावसान में देरी पर विपक्ष ने उठाए सवाल

लोकसभा के सत्रावसान में हो रही देरी को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने कहा कि सामान्य तौर पर सदन का सत्र समाप्त होने के कुछ दिनों के भीतर ही सत्रावसान (Prorogation) कर दिया जाता है, लेकिन इस बार इसमें असामान्य देरी देखने को मिल रही है।

सौगत रॉय ने न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि आमतौर पर लोकसभा का सत्र खत्म होने के करीब 10 दिनों के भीतर सदन को ‘साइन डाई’ यानी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाता है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में अभी तक सत्रावसान की घोषणा नहीं हुई है।

परिसीमन विधेयक को लेकर आशंका

TMC सांसद ने आशंका जताई कि केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक को पारित कराने के उद्देश्य से छोटा या विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर सकती है। उनका कहना है कि सरकार के पास फिलहाल इस तरह के संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा का सत्रावसान नहीं किए जाने से इस आशंका को और मजबूती मिल रही है कि सरकार बहुमत जुटाने के बाद किसी विशेष सत्र में परिसीमन से संबंधित विधेयक ला सकती है।

सरकार से स्थिति साफ करने की मांग

सौगत रॉय ने केंद्र से मांग की कि लोकसभा का सत्रावसान कब होगा, इसकी जानकारी जल्द दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, जिससे संसद और आम जनता के बीच बनी अनिश्चितता दूर हो सके।

जयराम रमेश ने भी उठाया सवाल

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सत्रावसान में हो रही देरी पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में लोकसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और सत्रावसान के बीच 2 से 4 दिनों का अंतर रहता है। कई मौकों पर दोनों प्रक्रियाएं एक ही दिन भी पूरी हुई हैं।

जयराम रमेश के मुताबिक, मौजूदा लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक सत्रावसान को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

2015 और 2021 का भी दिया उदाहरण

जयराम रमेश ने कहा कि 2015 के मानसून सत्र में स्थगन और सत्रावसान के बीच 28 दिनों का अंतर रहा था, जबकि 2021 में यह अंतर 20 दिनों का था। हालांकि, उनके अनुसार उन दोनों मामलों में मौजूदा समय जैसी परिस्थितियां नहीं थीं।

उन्होंने सवाल उठाया कि इस बार इतनी देरी की वजह क्या है। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री किसी संभावित विशेष सत्र में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

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