पूर्व कांग्रेस सांसद Sajjan Kumar का गुरुवार को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 1984 Anti-Sikh Riots Case में उम्रकैद की सजा काट रहे थे और इस समय तिहाड़ जेल में बंद थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें Safdarjung Hospital ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल की ओर से अभी तक उनकी मौत की Cause of Death स्पष्ट नहीं की गई है।
तीन बार रहे Lok Sabha MP
सज्जन कुमार Outer Delhi Lok Sabha Constituency से तीन बार सांसद रहे थे। एक समय वह कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। वर्ष 2018 में 1984 दंगा मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने Congress Party से इस्तीफा दे दिया था।
कैसे शुरू हुआ था 1984 का Anti-Sikh Violence?
31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi की उनके दो सिख अंगरक्षकों Satwant Singh और Beant Singh ने हत्या कर दी थी। इसके बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी।
हिंसा के दौरान कई जगहों पर सिखों के घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया। इस हिंसा में देशभर में 3,000 से अधिक Sikhs के मारे जाने की बात सामने आई थी, जिनमें बड़ी संख्या दिल्ली की थी।
2018 में Delhi High Court ने पलटा फैसला
सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 की हिंसा से जुड़े कई मामले तीन दशक से अधिक समय तक चलते रहे। अलग-अलग मामलों में अदालतों के फैसले भी अलग रहे और उन्हें कुछ मामलों में Acquittal मिली, जबकि कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया।
17 December 2018 को Delhi High Court ने ट्रायल कोर्ट के 2013 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें सज्जन कुमार को बरी किया गया था। हाई कोर्ट ने उन्हें पांच सिख लोगों की हत्या से जुड़े मामले में दोषी ठहराया।
यह मामला Raj Nagar Part-I, Palam Colony में पांच सिख पुरुषों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाए जाने से जुड़ा था। अदालत ने उन्हें Criminal Conspiracy और Abetment का दोषी माना और उनके प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक जेल में रखने की सजा सुनाई।
हाई कोर्ट ने 1984 की हिंसा को “Crimes Against Humanity” बताया था।
Supreme Court में चुनौती रही लंबित
सज्जन कुमार ने अपनी Conviction और Life Sentence को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी मृत्यु के समय यह कानूनी चुनौती लंबित थी।
कुछ मामलों में मिली Acquittal
जनवरी 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें Janakpuri और Vikaspuri में 1984 की हिंसा के दौरान लोगों को कथित तौर पर भड़काने से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में बरी कर दिया था।
हालांकि, इन Acquittals के बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो सकी, क्योंकि वह दूसरे मामलों में मिली उम्रकैद की सजा काट रहे थे।
2025 में मिली एक और Life Sentence
फरवरी 2025 में Rouse Avenue Court ने सज्जन कुमार को Saraswati Vihar Case में दोषी ठहराया था। यह मामला हिंसा के दौरान Jaswant Singh और Tarundeep Singh की मौत से जुड़ा था।
अभियोजन पक्ष ने उनके लिए Death Penalty की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए Life Imprisonment की सजा सुनाई।
जेल में ही हुई मौत
सज्जन कुमार अपनी जिंदगी के अंतिम समय में Tihar Jail में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
उनकी मौत के साथ 1984 Anti-Sikh Riots से जुड़े उनके खिलाफ चल रहे लंबे कानूनी सफर का भी अंत हो गया।


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