हनी ट्रैप में फंसा IAF का विंग कमांडर, पाकिस्तानी खुफिया एजेंट को रक्षा जानकारी देने के आरोप में गिरफ्तार

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के एक सेवारत विंग कमांडर को कथित तौर पर सोशल मीडिया के जरिए हनी ट्रैप में फंसाकर संवेदनशील रक्षा जानकारी साझा करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। 44 वर्षीय अधिकारी पर पाकिस्तानी खुफिया नेटवर्क से जुड़े एक कथित ऑपरेटिव के साथ संपर्क में रहने और गोपनीय दस्तावेज साझा करने का आरोप है। मामले में पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल कर दी है।

मई में हुई थी गिरफ्तारी

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अधिकारी को मई के अंत में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन मामले की जानकारी अब सार्वजनिक की गई है। पुलिस ने बताया कि भारतीय वायुसेना की ओर से मिली शिकायत और खुफिया इनपुट के आधार पर जांच शुरू हुई थी। 30 जुलाई को इस मामले में सक्षम अदालत के समक्ष चार्जशीट दाखिल की गई। मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

सोशल मीडिया के जरिए बनाया गया संपर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार, अधिकारी की सोशल मीडिया के जरिए एक महिला से पहचान हुई थी। आरोप है कि बातचीत और संपर्क बढ़ने के बाद महिला ने अधिकारी से सैन्य और रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल की। पुलिस को संदेह है कि महिला पाकिस्तानी खुफिया तंत्र के लिए काम कर रही थी।

सहयोगी के मोबाइल में संदिग्ध ऐप इंस्टॉल करने का आरोप

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, अधिकारी ने अपने एक सहयोगी के मोबाइल फोन में कथित तौर पर ऐसा सॉफ्टवेयर या ऐप इंस्टॉल करने की कोशिश की, जिससे डिवाइस का डेटा हासिल किया जा सकता था। एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि कहीं यह किसी बड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं था।

IAF ने कहा- ऐसी गतिविधियों पर जीरो टॉलरेंस

भारतीय वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित अधिकारी पहले से ही निगरानी में था। खुफिया इनपुट के आधार पर उसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंपा गया। वायुसेना ने ऐसी गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई है।

बड़े जासूसी नेटवर्क की भी जांच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अधिकारी ने कथित तौर पर कितनी और किस तरह की जानकारी साझा की। साथ ही उसके डिजिटल संपर्कों, संदिग्ध महिला और संभावित पाकिस्तानी हैंडलर्स के बीच संबंधों की जांच की जा रही है। एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस मामले के पीछे कोई बड़ा जासूसी नेटवर्क सक्रिय है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अधिकारी पर लगे आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं। उसे दोषी ठहराया नहीं गया है।

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