उत्तराखंड में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने के लिए शुरू की गई Ayushman Bharat Digital Mission (ABDM) की महत्वपूर्ण Scan and Share व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। इस पर गंभीर नाराजगी जताते हुए State Health Authority ने राज्य के प्रमुख Medical Colleges और सभी District Hospitals को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
केंद्र सरकार की समीक्षा से पहले बढ़ी चिंता
यह कार्रवाई National Health Authority (NHA) द्वारा जताई गई नाराजगी और केंद्र सरकार की प्रस्तावित समीक्षा के बाद की गई है। ABDM Uttarakhand CEO Reena Joshi की ओर से जारी नोटिस में Government Doon Medical College, Haridwar Medical College, Veer Chandra Singh Garhwali Medical College Srinagar, Soban Singh Jeena Medical College Almora सहित सभी जिलों के CMO और अस्पताल अधीक्षकों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है।
क्या है Scan and Share System?
Scan and Share सुविधा ABDM का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत मरीज ABHA ID (Ayushman Bharat Health Account) बनाकर अस्पताल में लगे QR Code को स्कैन कर सीधे OPD Registration कर सकते हैं।
इस व्यवस्था से अस्पतालों में लंबी कतारों से राहत मिलती है, मरीजों का समय बचता है और उनका Digital Health Record सुरक्षित रूप से ऑनलाइन संरक्षित रहता है। पहली बार ABHA ID बनाने और Driefcase App डाउनलोड करने में कुछ समय लग सकता है, लेकिन बाद की विजिट में मरीजों को तुरंत टोकन उपलब्ध हो जाता है।
अस्पतालों में नहीं मिल रहा अपेक्षित रिस्पॉन्स
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना होने के बावजूद अधिकांश सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाई है। कई अस्पतालों में मरीज अब भी पारंपरिक तरीके से पंजीकरण कराने को मजबूर हैं।
चौंकाने वाले आंकड़े
- Tehri District Hospital : Scan and Share के माध्यम से एक भी मरीज का पंजीकरण नहीं हो रहा।
- Haridwar District Hospital : प्रतिदिन केवल 20 से 100 मरीज इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं।
- Doon Coronation Hospital : लगभग 800 OPD मरीजों के मुकाबले सिर्फ 25 से 30 ऑनलाइन पंजीकरण।
- Almora Medical College : प्रतिदिन केवल 7 से 10 डिजिटल पर्चे।
- Srinagar Medical College : रोजाना 50 से 80 ऑनलाइन पर्चे जारी हो रहे हैं।
योजना के उद्देश्य पर उठे सवाल
इन आंकड़ों से साफ है कि Scan and Share Initiative का मुख्य उद्देश्य—अस्पतालों की भीड़ कम करना, मरीजों को तेज़ सेवा उपलब्ध कराना और स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलीकरण—जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पा रहा है।
अब स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित संस्थानों से जवाब मांगा है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

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