Rajasthan: इस्लामपुर का नाम बदलकर ‘श्रीरामपुर’ करने की सिफारिश पर विवाद, ग्रामीणों ने जताया विरोध

hunjhunu, Rajasthan: झुंझुनूं जिले के इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर Shrirampur करने की सिफारिश के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक ओर कुछ लोग इसे गांव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में ग्रामीण इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे गांव की मौजूदा पहचान और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ बता रहे हैं।

मामला अब गांव की सीमाओं से निकलकर जिला प्रशासन और राज्य सरकार तक पहुंच चुका है। ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन, ज्ञापन और पदयात्रा के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

BJP विधायक की सिफारिश के बाद शुरू हुआ विवाद

ग्रामीणों के अनुसार, 17 फरवरी 2026 को स्थानीय BJP MLA Rajendra Bhambu ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस्लामपुर का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने की अनुशंसा की थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं शुरू हुईं।

ग्राम पंचायत के सरपंच आमीन मनियार का दावा है कि पंचायत ने नाम परिवर्तन के समर्थन में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया है। पंचायत की ओर से प्रशासन को लिखित रूप से सूचित किया गया है कि गांव का नाम बदलने को लेकर कोई आधिकारिक प्रस्ताव स्वीकृत नहीं किया गया।

CM Office ने मांगी रिपोर्ट

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से 29 मई को झुंझुनूं जिला प्रशासन को पत्र भेजकर इस मामले में आवश्यक जानकारी और रिपोर्ट मांगी गई। इसके बाद प्रशासन ने नाम परिवर्तन से जुड़े ऐतिहासिक और दस्तावेजी तथ्यों की जांच शुरू कर दी है।

झुंझुनूं के District Collector Dr. Arun Garg ने कहा कि प्रशासन को नाम परिवर्तन के पक्ष और विपक्ष दोनों में ज्ञापन प्राप्त हुए हैं। विभिन्न दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की जा रही है तथा निर्धारित नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नाम परिवर्तन के समर्थन में क्या हैं तर्क?

विधायक राजेंद्र भाम्बू और नाम परिवर्तन के समर्थकों का दावा है कि मुगल काल से पहले गांव का नाम Shrirampur था। उनका कहना है कि कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों और स्थानीय परंपराओं में इस नाम का उल्लेख मिलता है।

समर्थकों का कहना है कि गांव की मूल पहचान को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से नाम परिवर्तन की मांग की जा रही है। हालांकि अभी तक इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है।

ग्रामीणों का विरोध, भाईचारे पर असर की आशंका

गांव के कई निवासियों का कहना है कि इस्लामपुर नाम दशकों से सरकारी रिकॉर्ड, शैक्षणिक दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। ग्रामीणों का तर्क है कि नाम परिवर्तन से गांव की ऐतिहासिक पहचान प्रभावित होगी और लोगों को प्रशासनिक स्तर पर कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में वर्षों से Communal Harmony और आपसी भाईचारा कायम है। उनके अनुसार नाम परिवर्तन का मुद्दा अनावश्यक विवाद को जन्म दे सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन को पुराने स्कूल रिकॉर्ड, राजस्व दस्तावेज, लगान रसीदें और अन्य ऐतिहासिक अभिलेख सौंपे हैं, जिनमें गांव का नाम इस्लामपुर दर्ज बताया गया है।

विरोध में पदयात्रा और आंदोलन की चेतावनी

नाम परिवर्तन के विरोध में ग्रामीणों ने हाल ही में करीब 18 किलोमीटर लंबी Padayatra निकालकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे जयपुर तक मार्च करेंगे और व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।

सरपंच आमीन मनियार ने कहा कि ग्रामीण किसी भी स्थिति में गांव का नाम बदलने के पक्ष में नहीं हैं और आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन धरना और आमरण अनशन भी किया जा सकता है।

कुछ ग्रामीण नाम परिवर्तन के समर्थन में भी

हालांकि गांव के सभी लोग इस प्रस्ताव के विरोध में नहीं हैं। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर गांव का नाम श्रीरामपुर किया जाना चाहिए।

समर्थकों का दावा है कि वे अपने पक्ष में ऐतिहासिक प्रमाण जुटा रहे हैं और जल्द ही प्रशासन को उपलब्ध कराएंगे। उनका कहना है कि गांव की मूल पहचान को पुनर्जीवित करने के लिए नाम परिवर्तन आवश्यक है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज

नाम परिवर्तन के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विरोध करने वाले ग्रामीणों और कुछ स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह मुद्दा राजनीतिक लाभ के लिए उठाया जा रहा है।

वहीं विधायक राजेंद्र भाम्बू ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिले में सामाजिक सौहार्द कायम है और किसी भी निर्णय को कानूनी प्रक्रिया तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही लिया जाएगा।

जांच पूरी होने के बाद होगा फैसला

फिलहाल प्रशासन इस्लामपुर और श्रीरामपुर नामों से जुड़े ऐतिहासिक, राजस्व और प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। जिला प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

इस बीच, गांव में नाम परिवर्तन को लेकर बहस जारी है और सभी की नजरें प्रशासनिक जांच तथा सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।

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