चुनाव ड्यूटी में लगे हजारों कर्मचारी वोट से वंचित, भाजपा ने सरकार को घेरा

शिमला, 16 मई । हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे पंचायत चुनावों के बीच भाजपा ने चुनाव ड्यूटी में लगाए गए कर्मचारियों के मतदान से वंचित होने का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस सरकार और चुनाव व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा प्रदेश सह मीडिया प्रभारी और पूर्व सचिव प्यार सिंह कंवर ने आरोप लगाया कि करीब 13 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी में लगाने के बावजूद उनके मतदान की उचित व्यवस्था नहीं की गई, जिससे हजारों कर्मचारी अपना मताधिकार इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

उन्होंने शनिवार को कहा कि प्रदेश में 3758 पंचायतों, जिला परिषद के 251 वार्डों और पंचायत समिति के 1769 वार्डों में तीन चरणों में चुनाव कराए जा रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए लगभग 1300 पोलिंग पार्टियां बनाई गई हैं और हर पोलिंग पार्टी में करीब छह कर्मचारी तैनात किए गए हैं। लेकिन चुनाव ड्यूटी सर्टिफिकेट (ईडीसी) जारी न होने और कर्मचारियों की ड्यूटी उनके मतदान क्षेत्रों से बाहर लगाए जाने के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी मतदान से वंचित हो रहे हैं।

प्यार सिंह कंवर ने कहा कि पंचायत चुनावों में कई बार जीत और हार का अंतर केवल एक या दो वोट तक सीमित रहता है। ऐसे में हजारों कर्मचारियों का वोट न डाल पाना चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी पूरा दिन चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाने में लगे रहेंगे, वही अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे, जिससे कर्मचारी वर्ग में नाराजगी है।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों को टालने की कोशिश की गई और अब चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के मतदान की व्यवस्था तक नहीं की गई। उनका कहना था कि यदि कर्मचारियों की ड्यूटी उनके अपने ब्लॉक या नजदीकी क्षेत्रों में लगाई जाती तो वे मतदान कर सकते थे, लेकिन इस दिशा में कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया।

प्यार सिंह कंवर ने राज्य चुनाव आयोग से मांग की कि चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के मतदान के लिए विशेष व्यवस्था की जाए ताकि कोई भी कर्मचारी अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि कर्मचारी वर्ग और आम जनता सरकार की कार्यशैली को देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा।

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